सरल शब्दों में
ब्रिटेन में एक समुद्री पवन चक्की फार्म पर किए गए अध्ययन से पता चला है कि ज्यादातर पक्षी टर्बाइन से टकराने से बचने के लिए अपना रास्ता बदल लेते हैं। दिन के समय टकराव की घटनाएं बहुत कम होती हैं। यह अध्ययन साफ ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
अध्ययन की पृष्ठभूमि
समुद्री पवन चक्की फार्म साफ और स्थायी ऊर्जा उत्पादन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। हालांकि, इनका वन्यजीवों, विशेषकर समुद्री पक्षियों पर प्रभाव वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों के लिए चिंता का विषय है। इस संदर्भ में, ब्रिटेन के मारगेट के तट पर स्थित ‘थानेट’ पवन चक्की फार्म पर एक दीर्घकालिक अध्ययन किया गया। इस अध्ययन का उद्देश्य यह जानना था कि समुद्री पक्षी टर्बाइन के साथ कैसे व्यवहार करते हैं और वे टकराव से कैसे बचते हैं।
रडार और कैमरा प्रणाली
थानेट फार्म के दो टर्बाइनों को रडार और उन्नत कैमरों से लैस किया गया था ताकि पक्षियों की गतिविधियों की निगरानी की जा सके। रडार द्वारा किसी भी संभावित पक्षी गतिविधि का पता लगते ही कैमरे वीडियो रिकॉर्ड करते हैं, जिससे शोधकर्ताओं को टर्बाइन के आसपास पक्षियों के व्यवहार का विशाल डेटा संग्रह करने में मदद मिली।
अध्ययन के परिणाम
अध्ययन से पता चला कि टर्बाइन के क्षेत्र में 299 पक्षी रिकॉर्डिंग में से केवल 6 टकराव हुए, और ये सभी दिन के समय में हुए। इससे यह संकेत मिलता है कि पक्षी अक्सर अंतिम क्षणों में टकराव से बचने के लिए कदम उठाते हैं।
पवन चक्की योजना पर प्रभाव
यह अध्ययन पवन चक्कियों के पक्षियों पर प्रभाव का आकलन करने वाले जोखिम मॉडल में सुधार करने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। यह पाया गया कि पक्षियों द्वारा टकराव से बचने की दर पहले की अपेक्षा अधिक है, जिससे कुछ स्थानों पर टकराव के जोखिम की अतिरंजित अनुमानित दरों को कम करने में मदद मिल सकती है।
निष्कर्ष
यह अध्ययन समुद्री पक्षियों और पवन चक्कियों के बीच के संबंध को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है, जिससे वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सुरक्षित उपायों के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विकास को जारी रखा जा सके। हालांकि, इस विषय पर अन्य स्थानों पर अतिरिक्त अध्ययन की आवश्यकता बनी रहती है।