आसान शब्दों में
जापान की टानाका और मलेशिया की एमईपी मिलकर ऐसी फैक्टरी बनाने जा रही हैं, जहाँ इस्तेमाल के बाद बची चीज़ों और इलेक्ट्रॉनिक कचरे से कीमती धातुएँ निकाली जाएँगी। वहाँ सोने को 99.99% शुद्धता तक शुद्ध करने की योजना है। फैक्टरी पेनांग में बनेगी और अप्रैल 2029 में काम शुरू करने का लक्ष्य है।
कचरे में छिपी धातुओं को फिर काम में लाने की योजना
जापान की टानाका प्रेशियस मेटल टेक्नोलॉजीज़ और मलेशिया की एमईपी एनवायरो टेक्नोलॉजी ने मिलकर एक नई कंपनी बनाने की घोषणा की है। यह कंपनी पहले इस्तेमाल की जा चुकी सामग्री की जाँच करेगी और उसमें मौजूद कीमती धातुओं को निकालकर शुद्ध करेगी। इसकी फैक्टरी पेनांग राज्य के बाटू कवान औद्योगिक क्षेत्र में बनाई जाएगी। योजना के मुताबिक, वहाँ अप्रैल 2029 में काम शुरू होगा। इससे मलेशिया में सामग्री की जाँच, सोने के शोधन और इलेक्ट्रॉनिक्स तथा सेमीकंडक्टर उद्योगों के लिए धातु से बने उत्पाद तैयार करने की स्थानीय क्षमता बढ़ेगी।
यह पहल संसाधनों के पुनर्चक्रण को आधुनिक निर्माण उद्योग से जोड़ती है। निर्माण के दौरान बची सामग्री और पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में मौजूद धातुएँ अक्सर दोबारा काम आ सकती हैं। उन्हें बेकार मानकर छोड़ने के बजाय वापस उत्पादन में लाने से उनका बेहतर उपयोग हो सकता है। नई फैक्टरी इसी काम के लिए बनाई जा रही है। इसका लक्ष्य क्षेत्र में ही धातुओं को सँभालने और उन्हें दोबारा इस्तेमाल के योग्य बनाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है।
साझेदारी में हिस्सेदारी तय
नई संयुक्त कंपनी का नाम टानाका एमईपी रिफाइनरी एसडीएन. बीएचडी. होगा। इसमें टानाका की हिस्सेदारी 66.7% और एमईपी की हिस्सेदारी 33.3% रहेगी। इस साझेदारी में औद्योगिक इस्तेमाल के लिए कीमती धातुओं को तैयार करने के क्षेत्र में जापानी कंपनी का अनुभव, धातुओं को वापस निकालने के काम में लगी मलेशियाई कंपनी की विशेषज्ञता के साथ जुड़ेगा। बाटू कवान औद्योगिक क्षेत्र में फैक्टरी बनाने से शोधन का काम मलेशिया के औद्योगिक इलाकों के पास होगा, न कि देश में उद्योगों से दूर किसी जगह पर।
योजना केवल कच्ची सामग्री को पिघलाकर धातु बनाने तक सीमित नहीं है। इसमें आई हुई सामग्री की जाँच, कीमती धातुओं का शोधन और उनसे उत्पाद बनाना शामिल है। कंपनी इन उत्पादों का आयात और निर्यात भी करेगी तथा उन्हें बेचेगी। इसके अलावा, कीमती धातुओं की सिल्लियों का कारोबार, उन्हें किराये पर देना और भंडारण करना भी काम के दायरे में है। इस तरह सामग्री की जाँच से लेकर तैयार धातु-उत्पादों के कारोबार तक की पूरी प्रक्रिया बनाई जाएगी।
निर्माण शुरू, कामकाज का लक्ष्य अप्रैल 2029
8 अक्टूबर 2026 को फैक्टरी की प्रस्तावित जगह पर भूमिपूजन समारोह हुआ। इसमें दोनों कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ पेनांग के अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग शामिल हुए। उपस्थित लोगों में राज्यपाल टुन दातो सेरी उतामा हाजी रमली बिन ङाह तालिब, मुख्यमंत्री चाओ कुऑन यू और पेनांग में जापान के महावाणिज्यदूत शिन्या माचिदा भी थे। कई अन्य सरकारी अधिकारी भी समारोह में मौजूद थे। यह आयोजन बताता है कि परियोजना तकनीकी सहयोग की योजना से आगे बढ़कर निर्माण के चरण में पहुँच रही है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि फैक्टरी में उत्पादन शुरू हो चुका है।
योजना में कामकाज शुरू करने का लक्ष्य अप्रैल 2029 रखा गया है। इस तारीख तक का समय बताता है कि यह लंबी अवधि की औद्योगिक परियोजना है, उत्पादन क्षमता में तुरंत होने वाला विस्तार नहीं। फैक्टरी चालू होने तक घोषित गतिविधियाँ भविष्य की योजनाएँ ही हैं। अब तक जारी जानकारी में उत्पादन क्षमता, सालाना संसाधित की जाने वाली सामग्री की मात्रा या कर्मचारियों की संभावित संख्या नहीं बताई गई है। इसलिए सिर्फ घोषणा के आधार पर यह अंदाज़ा लगाना संभव नहीं है कि फैक्टरी कितना उत्पादन करेगी या बाज़ार में उसकी कितनी हिस्सेदारी होगी।
कीमती धातुओं का पुनर्चक्रण क्यों जरूरी है
मलेशिया और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन के सदस्य देशों में सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक पुर्ज़ों और दूसरे सामान बनाने वाले कई कारखाने हैं। उत्पादन के दौरान ऐसी बची हुई सामग्री निकल सकती है जिसमें कीमती धातुएँ मौजूद हों। इसलिए जरूरी है कि इस सामग्री को बेकार कचरा मानने के बजाय उसमें से धातुएँ वापस पाने की कोशिश की जाए। जब धातु वाली सामग्री को अलग करके संसाधित किया जा सकता है, तो जाँच और शोधन के बाद उसे फिर औद्योगिक काम में लगाया जा सकता है।
इस्तेमाल की अवधि पूरी कर चुके इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी ऐसे संसाधनों का एक और स्रोत हैं। इन्हें इलेक्ट्रॉनिक कचरा कहा जाता है। कोई उपकरण इस्तेमाल से बाहर हो जाए, तो वह अपने आप गायब नहीं हो जाता। उसका उचित निपटारा करना और उसमें से दोबारा इस्तेमाल की जा सकने वाली चीज़ें निकालना जरूरी है। पर्यावरण से जुड़े कड़े होते नियम और संसाधनों को फिर उपयोग में लाने पर बढ़ता ध्यान उन देशों और क्षेत्रों में ऐसे कचरे के बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा देते हैं, जहाँ वह पैदा होता है। इसी संदर्भ में यह परियोजना कारखानों से बची सामग्री को स्थानीय स्तर पर धातुएँ वापस पाने की जरूरत से जोड़ती है।
हालाँकि, पुनर्चक्रण का यह मतलब नहीं कि हर बरामद सामग्री सीधे उत्पादन योग्य धातु में बदल जाएगी। अलग-अलग सामग्री की बनावट अलग हो सकती है, इसलिए फैक्टरी की योजना में शोधन से पहले उसकी जाँच करना शामिल है। यह जरूरी है, क्योंकि जाँच से पता चल सकता है कि पहले से तैयार की गई सामग्री में क्या-क्या मौजूद है और उसमें से धातुएँ निकालने का कौन-सा तरीका अपनाया जाए। घोषणा में सामग्री का विश्लेषण कंपनी के काम का हिस्सा बताया गया है। लेकिन मशीनों या धातुएँ निकालने के तरीकों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।
99.99% शुद्ध सोना और उद्योगों के लिए उत्पाद
काम शुरू होने के शुरुआती दौर में कंपनी 4N स्तर का सोना बनाने की योजना रखती है। इसका अर्थ है 99.99% शुद्धता। इसके साथ ही पोटैशियम गोल्ड सायनाइड भी बनाया जाएगा, जिसे संक्षेप में पीजीसी कहा जाता है। 4N सोने की शुद्धता का स्तर बताता है: इसमें चार नौ होते हैं, यानी सोने का अनुपात 99.99% है और दूसरी चीज़ों की मात्रा बहुत कम रहती है। यह शुरुआती उत्पादन के लिए बताई गई गुणवत्ता है, न कि ऐसा नतीजा जो फैक्टरी ने अब तक हासिल कर लिया हो।
शुरुआती उत्पाद बिजली, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योगों के लिए होंगे। इससे पता चलता है कि फैक्टरी का संबंध औद्योगिक इस्तेमाल में आने वाली धातुओं की माँग से है, न कि केवल सोने की सिल्लियों को निवेश की वस्तु या आम व्यापार की चीज़ के रूप में बेचने से। पोटैशियम गोल्ड सायनाइड भी इन उद्योगों के लिए प्रस्तावित उत्पादों की सूची में है, लेकिन घोषणा में इसकी उत्पादन मात्रा या इसके खास उपयोगों के बारे में जानकारी नहीं दी गई। यह भी नहीं बताया गया है कि शुरुआती दौर के बाद उत्पादों की सूची बदलेगी या नहीं। फिलहाल शुरुआती योजना में मुख्य रूप से उच्च शुद्धता वाला सोना और पीजीसी शामिल हैं।
फैक्टरी की घोषणा से पहले शुरू हुआ था सहयोग
दोनों कंपनियों के बीच सहयोग भूमिपूजन समारोह से पहले ही शुरू हो गया था। अगस्त 2024 में टानाका और एमईपी ने कीमती धातुओं को वापस निकालने के काम में तकनीकी मदद देने के लिए समझौता किया था। तब से दोनों कंपनियाँ मलेशिया में इन धातुओं के पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने के लिए साथ काम कर रही हैं। नई परियोजना इसी सहयोग को औपचारिक रूप देती है। अब कंपनियाँ केवल तकनीकी सहायता देने तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि एक ऐसी संयुक्त कंपनी बनाने की योजना है जो सामग्री की जाँच, शोधन, उत्पाद निर्माण और उनसे जुड़े कारोबार का काम करेगी।
योजना के अनुसार, फैक्टरी में ऐसी सामग्री आएगी जिस पर एमईपी पहले ही शुरुआती प्रक्रिया कर चुकी होगी। इसके बाद संयुक्त कंपनी उस सामग्री की जाँच करेगी, उसमें मौजूद कीमती धातुओं का शोधन करेगी और फिर उनसे उत्पाद बनाएगी। कंपनी उन उत्पादों को बेच सकेगी और उनका आयात-निर्यात भी कर सकेगी। सामग्री की शुरुआती प्रक्रिया और नई फैक्टरी में होने वाली जाँच तथा शोधन के बीच फर्क समझना जरूरी है। इस परियोजना में धातु वापस पाने की पूरी प्रक्रिया एक ही जगह पर नहीं होगी। इसके बजाय, अलग-अलग चरणों का काम अलग-अलग जगहों पर किया जाएगा।
स्थानीय प्रक्रिया में अनुभव और गुणवत्ता की भूमिका
टानाका के मुताबिक, इस साझेदारी में कीमती धातुओं के शोधन और प्रसंस्करण में उसका लंबे समय से हासिल अनुभव काम आएगा। कंपनी को गुणवत्ता पर नियंत्रण, उत्पादन का प्रबंधन और इनसे जुड़े अन्य क्षेत्रों का भी अनुभव है। इस क्षमता को धातुएँ वापस निकालने के काम में एमईपी की विशेषज्ञता के साथ जोड़कर मलेशिया में कीमती धातुओं के पुनर्चक्रण की एक जुड़ी हुई व्यवस्था बनाने का लक्ष्य है। यहाँ पूरी व्यवस्था से आशय कई चरणों को आपस में जोड़ने से है—पहले से तैयार की गई सामग्री लेना, उसकी जाँच करना, धातुओं को शुद्ध करना और उनसे औद्योगिक उत्पाद तैयार करना।
गुणवत्ता पर नियंत्रण ऐसी परियोजना में खास मायने रखता है जहाँ तय शुद्धता वाला सोना बनाने का लक्ष्य है। औद्योगिक उपयोग के लिए किसी उत्पाद की अहमियत केवल इस बात से नहीं तय होती कि उसमें सोना है; यह भी जरूरी है कि वह घोषित मानकों के मुताबिक हो और उसकी गुणवत्ता लगातार एक जैसी बनी रहे। उत्पादन प्रबंधन से यह भी जुड़ता है कि फैक्टरी में आने वाली सामग्री से कौन-से अंतिम उत्पाद बनाए जा सकते हैं। फिर भी, दोनों कंपनियों ने जाँच की प्रक्रिया, गुणवत्ता नियंत्रण के मानकों या सामग्री का पता रखने की व्यवस्था का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया है। इसलिए अभी इतना ही कहा जा सकता है कि ये अनुभव उनके प्रस्तावित कामकाज के मॉडल का हिस्सा होंगे; यह नहीं कि कोई पूरी तरह लागू व्यवस्था पहले से चल रही है।
बड़े पुनर्चक्रण नेटवर्क में एक नई कड़ी
टानाका कीमती धातुओं को वापस पाने और उनका शोधन करने का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क बढ़ा रही है। इस नेटवर्क में जापान, यूरोप, उत्तरी अमेरिका, चीन, ताइवान और अन्य क्षेत्रों की सुविधाएँ शामिल हैं। मलेशिया में प्रस्तावित फैक्टरी इस मौजूदगी को दक्षिण-पूर्व एशिया तक फैलाएगी और आसियान क्षेत्र में कंपनी के काम को मजबूत करेगी। कंपनी के नज़रिये से, अलग-अलग क्षेत्रों में मौजूदगी से धातुएँ वापस पाने और उनका फिर उपयोग करने के रास्ते बनते हैं। इससे कीमती धातुओं की आपूर्ति को स्थिर रखने में भी मदद मिल सकती है।
घोषणा में यह नहीं कहा गया है कि नई फैक्टरी पहले से मौजूद नेटवर्क की जगह लेगी या उसे खत्म कर देगी। इसे उस बड़े नेटवर्क में एक अतिरिक्त सुविधा के तौर पर पेश किया गया है। पुनर्चक्रण की क्षमता बढ़ने से धातुओं के दूसरे स्रोतों की जरूरत खत्म नहीं होगी, लेकिन इससे उन सामग्रियों में से कुछ धातुएँ वापस हासिल की जा सकती हैं जो पहले ही औद्योगिक प्रक्रियाओं या इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में इस्तेमाल हो चुकी हैं। मलेशिया के लिए घोषित अहमियत यह है कि वहाँ एक स्थानीय ढाँचा बनेगा, जो बरामद सामग्री को शोधन और औद्योगिक उत्पादों से जोड़ेगा। इस तरह धातुएँ वापस पाने का काम निर्माण की पूरी प्रक्रिया से जुड़ सकेगा, न कि उससे अलग गतिविधि बनकर रह जाएगा।
अभी किन बातों की जानकारी नहीं है
घोषणा में जगह, साझेदारों, हिस्सेदारी, शुरुआती उत्पादों और काम शुरू करने के लक्ष्य की जानकारी दी गई है, लेकिन फैक्टरी में किए जाने वाले निवेश या उसकी क्षमता के आँकड़े नहीं बताए गए हैं। यह भी स्पष्ट नहीं है कि वह कितना सोना बनाएगी, कितने कचरे या बची सामग्री को संसाधित करेगी, या कचरा घटाने और धातुओं की आपूर्ति बढ़ाने में उसका कितना योगदान होगा। इसलिए इस समय मलेशियाई बाज़ार या पूरे क्षेत्र में धातुओं की आपूर्ति पर परियोजना के असर का सही आकलन नहीं किया जा सकता।
भविष्य में नतीजों को समझने के लिए ये जानकारियाँ जरूरी होंगी। व्यवहार में पुनर्चक्रण फैक्टरी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि उसे उपयुक्त सामग्री नियमित रूप से मिलती है या नहीं, वह उसकी सही जाँच और प्रक्रिया कर पाती है या नहीं, और उसके उत्पाद औद्योगिक ग्राहकों की जरूरतों के मुताबिक हैं या नहीं। इन बातों का आकलन संचालन के आँकड़े आने के बाद किया जाना चाहिए, पहले से मानकर नहीं चलना चाहिए। फिलहाल पक्की जानकारी यही है कि दोनों कंपनियों ने परियोजना शुरू करने की दिशा में कदम उठाया है, पेनांग में जगह चुनी है, काम शुरू करने का लक्ष्य तय किया है और शुरुआत में 99.99% शुद्धता वाला सोना तथा पीजीसी बनाने की योजना रखी है।
निष्कर्ष
टानाका और एमईपी की परियोजना मलेशिया में कीमती धातुओं को वापस पाने और उनका शोधन करने की एक स्थानीय व्यवस्था खड़ी करने की कोशिश है। इसका आधार इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग से बची सामग्री और इलेक्ट्रॉनिक कचरे में मौजूद धातुओं को फिर इस्तेमाल में लाना है। संयुक्त कंपनी में टानाका की हिस्सेदारी 66.7% और एमईपी की 33.3% होगी। फैक्टरी पेनांग के बाटू कवान में बनेगी और अप्रैल 2029 में काम शुरू करने का लक्ष्य है। योजना में सामग्री की जाँच, धातुओं का शोधन और औद्योगिक उत्पाद बनाना शामिल है। शुरुआती उत्पादों में 4N यानी 99.99% शुद्ध सोना और पोटैशियम गोल्ड सायनाइड होगा। यह परियोजना अगस्त 2024 में शुरू हुए तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाती है और टानाका के वैश्विक पुनर्चक्रण नेटवर्क में एक नई कड़ी जोड़ती है। इसका वास्तविक उत्पादन और असर कितना होगा, यह संचालन के वे आँकड़े सामने आने पर ही पता चलेगा जिनकी घोषणा अभी नहीं हुई है।