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अंतरिक्ष स्टेशन की वह छोटी-सी कड़ी, जिसने सबको जोड़ दिया

आसान शब्दों में

हार्मनी अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का एक ऐसा हिस्सा है जो अलग-अलग प्रयोगशालाओं और दूसरे मॉड्यूलों को आपस में जोड़ता है। इसमें उपकरण रखने और अंतरिक्ष यात्रियों के ठहरने की जगह भी है। 2007 में इसके जुड़ने से स्टेशन में काम करने और रहने की जगह बढ़ी, साथ ही आगे नए हिस्से जोड़ना भी आसान हुआ।

सिर्फ एक कमरा नहीं, संपर्क का केंद्र

जब आप अंतरिक्ष स्टेशन की कल्पना करते हैं, तो शायद अलग-अलग प्रयोगशालाओं से बनी एक बड़ी संरचना आपके मन में आती है। लेकिन इन हिस्सों को एक ही स्टेशन की तरह काम करने के लिए उनके बीच रास्ते और जोड़ने के स्थान भी जरूरी हैं। 23 अक्टूबर 2007 को स्टेशन के विस्तार का एक अहम दौर शुरू हुआ, जब अंतरिक्ष शटल डिस्कवरी हार्मनी मॉड्यूल को लेकर पहुँचा। यह केवल एक अतिरिक्त कमरा नहीं था। इसने स्टेशन के हिस्सों को व्यवस्थित ढंग से जोड़ने और अंतरिक्ष यात्रियों तथा उनके काम के लिए उपलब्ध जगह बढ़ाने में मदद की।

हार्मनी को नोड 2 भी कहा जाता है। यूनिटी के बाद यह नासा की ओर से स्टेशन के लिए भेजा गया दूसरा प्रमुख जोड़ने वाला मॉड्यूल था। यूनिटी को नोड 1 के नाम से जाना जाता है। हार्मनी का काम उसके नाम से भी साफ होता है: यह स्टेशन के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने वाला केंद्र है और प्रयोगशालाओं को आपस में जोड़ने का साझा स्थान देता है। इसलिए इसका महत्व केवल इसके भीतर रखे उपकरणों तक सीमित नहीं था। इसने स्टेशन को आगे बढ़ाने और नए हिस्से जोड़ने के रास्ते भी खोले।

हार्मनी की चौड़ाई लगभग 14 फुट और लंबाई 24 फुट है—यानी इसकी लंबाई करीब एक छोटी बस जितनी है। जमीन पर बनी किसी इमारत से तुलना करें, तो ये माप छोटे लग सकते हैं। लेकिन कक्षा में चक्कर लगाते स्टेशन पर जगह बहुत कीमती होती है और हर हिस्से को कई काम करने पड़ते हैं। हार्मनी के भीतर उपकरण और सामान रखने की जगह है, कुछ अंतरिक्ष यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था है, और बाहर दूसरे मॉड्यूल या आने वाले यानों को जोड़ने के स्थान भी हैं।

नासा के लिए यह मॉड्यूल इटली की कंपनी थेल्स एलेनिया स्पेस ने बनाया था। इसमें दूसरे हिस्सों को जोड़ने के पाँच स्थान हैं। इन तय स्थानों से स्टेशन के अलग-अलग हिस्से आपस में जुड़ सकते हैं। इन्हीं की वजह से हार्मनी कक्षा में एक चौराहे की तरह काम करती है। प्रयोगशालाएँ इससे जुड़ सकती हैं, कुछ स्थानों का इस्तेमाल आने वाले मालवाहक यानों के लिए किया गया है, और इसके ऊपरी हिस्से पर आने वाले यानों को जोड़ने का एक और स्थान है।

डिस्कवरी से शुरू हुआ सफर

हार्मनी अक्टूबर 2007 में शटल मिशन एसटीएस-120 के साथ अंतरिक्ष पहुँची। वहाँ पहुँचते ही उसे उसके स्थायी स्थान पर नहीं लगाया गया। पहले अंतरिक्ष यात्रियों ने उसे अस्थायी तौर पर यूनिटी मॉड्यूल से जोड़ दिया। यह स्थापना की कई चरणों वाली प्रक्रिया का हिस्सा था। हार्मनी को अंतिम जगह पहुँचाने से पहले स्टेशन के जोड़ने वाले स्थानों की व्यवस्था बदलनी जरूरी थी।

शटल के स्टेशन से रवाना होने के बाद, चालक दल ने स्टेशन की रोबोटिक बाँह से शटल को जोड़ने वाले हिस्से को डेस्टिनी प्रयोगशाला के पास वाली जगह से हटाया। इससे हार्मनी को डेस्टिनी के बगल में उसके स्थायी स्थान तक ले जाने के लिए पर्याप्त जगह बन गई। करीब 2 सप्ताह बाद, मॉड्यूल यूनिटी के पास अपने अस्थायी ठिकाने से निकलकर डेस्टिनी प्रयोगशाला के आगे वाले जोड़ने के स्थान पर पहुँचा। स्रोत के अनुसार, डेस्टिनी स्टेशन की नासा की मुख्य प्रयोगशाला है।

यह पूरी प्रक्रिया दिखाती है कि किसी नए मॉड्यूल को लाकर खाली जगह पर रख देना आसान काम नहीं है। स्टेशन के मॉड्यूल और यान सीमित संख्या में उपलब्ध जोड़ने वाले स्थान साझा करते हैं। कभी-कभी एक हिस्से को हटाना या दूसरी जगह करना पड़ता है, ताकि नया हिस्सा उस स्थान पर लग सके जहाँ वह स्टेशन की बनावट के लिए सबसे उपयोगी हो। हार्मनी के मामले में रोबोटिक बाँह से शटल को जोड़ने वाला हिस्सा हटाना इसी व्यवस्था का जरूरी कदम था, कोई मामूली बात नहीं।

यूरोप और जापान की प्रयोगशालाओं तक रास्ता

डेस्टिनी के पास लगने के बाद हार्मनी अंतरराष्ट्रीय स्टेशन की दो अहम प्रयोगशालाओं को जोड़ने वाला केंद्र बन गई। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी की कोलंबस प्रयोगशाला इससे दाईं ओर जुड़ी, जबकि जापान की किबो प्रयोगशाला बाईं ओर लगी। इस तरह हार्मनी ने स्टेशन के अलग-अलग हिस्सों को आपस में जोड़ने की कड़ी का काम किया। वह ऐसा अलग-थलग अतिरिक्त कमरा नहीं थी जिसका संपर्क केवल एक प्रयोगशाला से हो।

हार्मनी के आसपास मॉड्यूलों की यह व्यवस्था स्टेशन को बढ़ाने में व्यावहारिक रूप से काम आई। सही जगह पर जोड़ने का स्थान होने से मौजूदा ढाँचे में नए मॉड्यूल शामिल किए जा सकते हैं। स्टेशन पर आने वाले यानों के लिए भी कुछ स्थानों का उपयोग किया जा सकता है। हार्मनी के कुछ स्थान मालवाहक यानों के काम आए, जबकि इसके ऊपरी हिस्से का स्थान आने वाले यानों को इससे जोड़ने की सुविधा देता है। इस तरह यह मॉड्यूल स्टेशन के भीतर के हिस्सों को जोड़ने के साथ-साथ बाहर से आने वाले यानों के स्वागत में भी काम आया।

हार्मनी नाम उस मॉड्यूल के लिए अच्छा बैठता है जो अलग-अलग साझेदारों और अंतरिक्ष कार्यक्रमों से आए हिस्सों को जोड़ता है। मगर शुरू में इसका नाम हार्मनी नहीं था। पहले इसे नोड 2 कहा जाता था और बाद में नासा की एक सार्वजनिक प्रतियोगिता के जरिए इसका मौजूदा नाम चुना गया। व्यावहारिक रूप से नाम बदलने से इसका काम नहीं बदला: प्रयोगशालाओं और मॉड्यूलों को जोड़ने के लिए एक व्यवस्थित केंद्र देना और स्टेशन पर उपलब्ध जगह का बेहतर उपयोग संभव करना।

अंतरिक्ष यात्रियों और उपकरणों के लिए जगह

हार्मनी के भीतर सामान और उपकरण रखने के लिए 8 रैक हैं। इनमें से 4 विमान के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए हैं। बाकी 4 का इस्तेमाल सामान रखने या चालक दल के ठहरने की जगह तैयार करने में किया जा सकता है। इस मॉड्यूल में अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों के सोने के लिए जगह भी है। इसलिए इसकी भूमिका केवल प्रयोगशालाओं के बीच आने-जाने के रास्ते तक सीमित नहीं रही; यह रहने की जरूरत भी पूरी करता है।

स्टेशन पर रहने और काम करने की व्यवस्थाएँ एक-दूसरे से अलग नहीं होतीं। उपकरण रखने या चालक दल के लिए जगह बनाने वाला हिस्सा भी एक जुड़ी हुई संरचना के भीतर होता है। उसे लोगों की आवाजाही और पास के मॉड्यूलों की जरूरतों के साथ तालमेल बिठाना पड़ता है। हार्मनी के 8 रैक भीतर कई तरह के इस्तेमाल की गुंजाइश देते हैं, जबकि इसके 5 जोड़ने वाले स्थान इसे स्टेशन के दूसरे हिस्सों से जोड़ते हैं। इस तरह यह मॉड्यूल दो स्तरों पर काम करता है: अपने भीतर की जगह को व्यवस्थित करता है और बाहर के हिस्सों को जोड़ने की सुविधा देता है।

हार्मनी के आने से रहने की जगह में हुए बदलाव को समझाने के लिए स्टेशन की तुलना एक ऐसे घर से की गई थी जो लगभग 3 शयनकक्ष वाले घर के आकार से बढ़कर 5 शयनकक्ष वाले घर जैसा हो गया। इसका मतलब यह नहीं कि स्टेशन सचमुच किसी आम घर जैसा है। यह तुलना बस बताती है कि चालक दल के लिए इस्तेमाल की जा सकने वाली जगह कितनी बढ़ी। जहाँ हर चीज के लिए जगह सीमित हो, वहाँ जमीन पर छोटी दिखने वाली बढ़ोतरी भी कक्षा में रहने और काम करने के लिए नए अवसर दे सकती है।

रुका हुआ विस्तार फिर आगे बढ़ा

हार्मनी का जुड़ना अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के निर्माण के एक नए दौर की शुरुआत थी। इससे पहले स्टेशन में नया कमरा जोड़ने का आखिरी मौका 2001 में आया था, जब रूस का पिर्स जोड़ने वाला मॉड्यूल जोड़ा गया। बाद में उसे हटा दिया गया। उस जोड़ और हार्मनी के आने के बीच कई साल तक स्टेशन में वैसा कोई नया कमरा शामिल नहीं हुआ। इस वजह से एसटीएस-120 मिशन स्टेशन का विस्तार फिर शुरू करने वाला एक खास कदम बना।

इस मिशन का महत्व केवल तय आकार का एक मॉड्यूल अंतरिक्ष में भेजने में नहीं था। इससे ऐसी संरचना तैयार हुई जिसने स्टेशन को आगे दूसरे मॉड्यूल जोड़ने और उनकी जगह तय करने में मदद की। हार्मनी खुद कोलंबस और किबो को जोड़ने की कड़ी बनी। इसके स्थान मालवाहक यानों और यान जोड़ने के काम भी आए। ऐसा जोड़ने वाला केंद्र न हो, तो स्टेशन का विस्तार अधिक पेचीदा हो जाता, क्योंकि हर नए मॉड्यूल को पहले से बनी व्यवस्था में सही जोड़ने की जगह चाहिए।

यहाँ स्टेशन की मॉड्यूलर बनावट का महत्व सामने आता है। इसके अलग-अलग हिस्से अलग काम करते हैं, लेकिन तय किए गए स्थानों के जरिए एक-दूसरे से जुड़ते हैं। हार्मनी न तो डेस्टिनी की जगह लेती है, न कोलंबस या किबो प्रयोगशाला की। उसका काम इनके बीच संपर्क की सुविधा देना और अपने भीतर अतिरिक्त जगह उपलब्ध कराना है। इस अर्थ में उसका असर उसके आकार से कहीं बड़ा था, क्योंकि उससे जुड़े मॉड्यूलों और उसके स्थानों तक पहुँचने वाले यानों को भी उसका लाभ मिला।

हार्मनी ने बदलाव कैसे लाया

हार्मनी लगने से पहले स्टेशन में रहने और काम करने के लिए उपलब्ध जगह बाद की तुलना में कम थी। उसके जुड़ने पर स्टेशन को एक ऐसा केंद्रीय हिस्सा मिला जो अंतरराष्ट्रीय प्रयोगशालाओं से जुड़ता था, उपकरण रखने के लिए रैक देता था और अमेरिकी चालक दल के कुछ सदस्यों के ठहरने की जगह भी उपलब्ध कराता था। इन कामों का एक साथ होना ही हार्मनी को अहम बनाता है: इसने अंदर की जगह बढ़ाई, जोड़ने की व्यवस्था दी और यानों के आने के लिए जगह उपलब्ध कराई।

इसे लगाने के क्रम से यह भी पता चलता है कि कक्षा में स्टेशन का विस्तार कितना जटिल हो सकता है। हार्मनी डिस्कवरी से पहुँची, पहले कुछ समय के लिए यूनिटी से जोड़ी गई, फिर रोबोटिक बाँह की मदद से शटल को जोड़ने वाला हिस्सा हटाया गया और उसके बाद मॉड्यूल को डेस्टिनी के पास उसकी अंतिम जगह पर ले जाया गया। वहाँ से कोलंबस और किबो को दोनों ओर जोड़ा जा सका। इन चरणों के कारण एक ही मिशन में भेजा गया मॉड्यूल स्टेशन की स्थायी बनावट और कामकाज का हिस्सा बन गया।

हार्मनी स्टेशन की सबसे बड़ी प्रयोगशाला नहीं थी और न ही उसका उद्देश्य किसी एक तरह का शोध करना था। उसकी ताकत इस बात में थी कि वह कई कामों में मदद करने वाली संरचना थी। वह काम की जगहों को जोड़ती, चालक दल और उपकरणों की कुछ जरूरतें पूरी करती और दूसरे मॉड्यूलों को लगाने की सुविधा देती। जब किसी अंतरिक्ष स्टेशन के हिस्से अलग-अलग हों, तो सोच-समझकर बनाई गई जोड़ने की जगह बहुत मायने रखती है। वह केवल अतिरिक्त जगह नहीं देती, बल्कि अलग-अलग हिस्सों को एक साथ काम करने योग्य भी बनाती है।

निष्कर्ष

हार्मनी 23 अक्टूबर 2007 को शटल डिस्कवरी के साथ एसटीएस-120 मिशन में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुँची और उसके विस्तार के नए दौर की शुरुआत में अहम भूमिका निभाई। करीब 14 फुट चौड़ी और 24 फुट लंबी इस इकाई में 5 जोड़ने के स्थान और 8 अंदरूनी रैक हैं। यह मॉड्यूलों को जोड़ती है, उपकरण रखने की जगह देती है और अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों के ठहरने में काम आती है। डेस्टिनी के पास लगने के बाद यह कोलंबस और किबो प्रयोगशालाओं के बीच संपर्क का केंद्र बनी। हार्मनी ने चालक दल के लिए उपलब्ध जगह बढ़ाने के साथ स्टेशन में नए मॉड्यूल और यान जोड़ना भी आसान किया। यह सिर्फ कक्षा में बना एक और कमरा नहीं, बल्कि स्टेशन के अलग-अलग हिस्सों को एक बड़े, आपस में जुड़े ढाँचे की तरह काम करने में मदद देने वाली कड़ी है।