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चाँद के पार से रोबोटिक अंतरिक्ष अभियानों की कमान तक

आसान शब्दों में

चाँद के चारों ओर उड़ान भरने वाले रीड वाइज़मैन अब एक ऐसी संस्था में नेतृत्व की भूमिका निभाएँगे, जो दूर के ग्रहों और चंद्रमाओं पर रोबोटिक यान भेजती है। उनका नया काम अंतरिक्षयान उड़ाना नहीं, बल्कि उन टीमों और कामकाज को दिशा देने में मदद करना होगा, जो ऐसे अभियान संभव बनाते हैं। उनके साथ चाँद की यात्रा करने वाले तीनों साथियों ने भी अपने करियर में नई राहें चुनी हैं।

एक अलग तरह की नेतृत्व भूमिका

रीड वाइज़मैन ने नासा के दशकों बाद हुए पहले मानवयुक्त चाँद-यात्रा अभियान, आर्टेमिस 2, की कमान संभाली थी। लेकिन अब उनका करियर अंतरिक्षयान उड़ाने के बजाय एक नई दिशा ले रहा है। 30 नवंबर से वह जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी के उपनिदेशक और कैलिफ़ोर्निया प्रौद्योगिकी संस्थान यानी कैलटेक के उपाध्यक्ष का पद सँभालेंगे। यह संस्था अमेरिकी अंतरिक्ष-अन्वेषण कार्यक्रम के अहम केंद्रों में से एक है। इस भूमिका में उनका काम अंतरिक्षयान में बैठकर अभियान चलाने से अलग होगा: उन्हें उस संस्थान को दिशा देने में मदद करनी होगी, जो सौरमंडल के अलग-अलग हिस्सों में रोबोटिक अभियान तैयार करता और संचालित करता है।

जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी ने अक्टूबर 2026 के आखिर में वाइज़मैन की नई नियुक्ति की घोषणा की। वह प्रयोगशाला के निदेशक डेव गैलाघर के नेतृत्व में काम करेंगे। उनकी ज़िम्मेदारियों में संस्थान की रणनीतिक दिशा तय करने में योगदान देना, उसके संसाधनों की देखरेख करना और कामकाज को लगातार बेहतर बनाने में मदद करना शामिल है। इसका मतलब यह नहीं है कि वाइज़मैन किसी ग्रह तक यान ले जाएँगे या किसी अंतरिक्ष-जाँच यान को खुद चलाएँगे। उनकी भूमिका एक बड़े संस्थान का कामकाज सँभालने में होगी, जहाँ विज्ञान और इंजीनियरिंग की अनेक टीमें और अभियान आपस में तालमेल से काम करते हैं।

इस बदलाव का महत्व सिर्फ योजनाएँ बनाने या समय-सारिणी पर नज़र रखने तक सीमित नहीं है। अंतरिक्ष-अभियान विकसित करने वाली संस्था को बड़े वैज्ञानिक लक्ष्यों और उपलब्ध संसाधनों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। साथ ही, उसे अपना कामकाज सुचारु रखना होता है और ऐसे प्रोजेक्ट पूरे करने होते हैं, जो कई साल तक चल सकते हैं। वाइज़मैन के पास उड़ान, परीक्षण और अंतरिक्षयात्रियों से जुड़े काम सँभालने का अनुभव है, जो इस तरह की ज़िम्मेदारियों में काम आ सकता है। फिर भी, रोबोटिक अभियानों से जुड़ी प्रयोगशाला चलाना और अंतरिक्ष में एक दल की कमान सँभालना स्वाभाविक रूप से अलग काम हैं।

नासा के प्रशासक जेरेड आइज़ैकमैन ने वाइज़मैन की तारीफ़ करते हुए कहा कि उनमें तकनीकी समझ, कामकाज का अनुभव और नेतृत्व की क्षमता—तीनों का मेल है। उनके मुताबिक, ये खूबियाँ प्रयोगशाला को यह तय करने में मदद कर सकती हैं कि वह अपनी उपलब्धियों की सीमाओं को और कैसे आगे बढ़ाए। यह प्रशंसा उनके अनुभव को देखते हुए की गई है। वाइज़मैन अमेरिकी नौसेना में पायलट और परीक्षण-पायलट रहे, बाद में नासा में अंतरिक्षयात्रियों से जुड़े काम सँभाले और फिर चाँद के पास से गुज़रने वाले मानवयुक्त अभियान का नेतृत्व किया। उनके करियर के हर पड़ाव ने उन्हें जोखिमों, फैसलों और उन टीमों को समझने का अलग नज़रिया दिया, जिनकी बदौलत अंतरिक्ष-अभियान पूरे होते हैं।

ऐसी प्रयोगशाला जहाँ ज़्यादातर खोजें रोबोट करते हैं

जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी उस केंद्र से अलग है, जिसका मुख्य ध्यान अंतरिक्षयात्रियों की उड़ानों पर रहता है। यह अमेरिकी सरकार की आर्थिक मदद से चलने वाला अनुसंधान और विकास केंद्र है, जिसका प्रबंधन कैलटेक करता है। इसका बड़ा काम बिना इंसानी दल वाले अंतरिक्षयानों के ज़रिए अंतरिक्ष की खोज करना है। इससे जुड़े प्रमुख अभियानों में मंगल पर काम कर रहे परसीवरेंस और क्यूरियोसिटी रोवर, बृहस्पति के चंद्रमा यूरोपा का अध्ययन करने जा रहा यूरोपा क्लिपर अभियान और वॉयजर अंतरिक्ष-जाँच यान शामिल हैं, जो अब भी दूर अंतरिक्ष में अपनी यात्रा जारी रखे हुए हैं।

यह संस्था नासा के डीप स्पेस नेटवर्क का संचालन भी करती है। यह संचार व्यवस्था दूर स्थित अंतरिक्षयानों को आदेश भेजने और उनसे आँकड़े हासिल करने में मदद करती है। आम लोगों को यह काम मंगल पर उतरते यान की तस्वीरों जितना दिखाई नहीं देता, लेकिन इसके बिना अभियान चलाना संभव नहीं होगा। दूर मौजूद यान को अपनी खोजों की जानकारी धरती तक पहुँचानी होती है और वहाँ से मिले निर्देशों के आधार पर काम करना होता है। इस तरह प्रयोगशाला एक ओर अंतरिक्ष-अभियान तैयार करती है, तो दूसरी ओर उस संचार व्यवस्था के अहम हिस्से भी सँभालती है, जो नासा को सौरमंडल में फैले उसके यानों से जोड़े रखती है।

इस पृष्ठभूमि में वाइज़मैन का इंसानी अंतरिक्ष-उड़ानों का अनुभव रोबोटिक अभियानों के काम आ सकता है। मानवयुक्त अंतरिक्षयान में चालक दल और धरती पर मौजूद टीमों के बीच सटीक तालमेल और जल्दी फैसले लेने की ज़रूरत होती है। इसके उलट, रोबोटिक अभियान अक्सर बहुत दूर तक जाते हैं, उनमें संचार में देरी हो सकती है और कई काम पहले से सोच-समझकर तैयार करने पड़ते हैं। इन अंतरों के बावजूद, दोनों तरह के अभियानों में टीमों और तैयारियों का महत्व बना रहता है। वाइज़मैन का अनुभव यह समझने में उपयोगी हो सकता है कि अभियान तैयार करते समय उसमें काम करने वाले लोगों की ज़रूरतों का ध्यान कैसे रखा जाए और परीक्षण तथा संचालन की तैयारी कितनी अहम है।

नौसेना से अंतरिक्ष स्टेशन तक का सफ़र

वाइज़मैन का बचपन बाल्टीमोर शहर में बीता। उन्होंने अमेरिकी नौसेना में सेवा की और कैप्टन के पद से सेवानिवृत्त हुए। पहले वह पायलट बने और फिर परीक्षण-पायलट के तौर पर काम किया। इस काम में विमानों और उनकी प्रणालियों का तय परिस्थितियों में आकलन करना पड़ता है। साथ ही, यह देखना होता है कि अलग-अलग हालात में उपकरण और चालक दल कैसे प्रतिक्रिया देते हैं। 2009 में वह नासा के अंतरिक्षयात्री दल में शामिल हुए और उनका करियर सैन्य उड़ानों से अंतरिक्ष-अभियानों की तैयारी की ओर मुड़ गया।

वाइज़मैन पहली बार रूसी सोयुज़ टीएमए-13एम अंतरिक्षयान से पृथ्वी की कक्षा में पहुँचे और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन गए। उन्होंने वहाँ अभियान 40 और 41 के दौरान 165 दिन बिताए। इस दौरान उन्होंने दो बार अंतरिक्ष में चहलकदमी की, जिनकी कुल अवधि करीब 13 घंटे थी। यह अनुभव दिखाता है कि अंतरिक्षयात्री का काम सिर्फ अंतरिक्ष की यात्रा करना नहीं है। स्टेशन पर रहना रोज़मर्रा के कामों, वैज्ञानिक प्रयोगों, मरम्मत और अंतरिक्षयान के बाहर किए जाने वाले कार्यों की लंबी कड़ी है। इसके लिए प्रशिक्षण और टीम के साथ तालमेल पर लगातार भरोसा करना पड़ता है।

आर्टेमिस 2 के लिए चुने जाने से पहले वाइज़मैन दिसंबर 2020 से नवंबर 2022 तक नासा में अंतरिक्षयात्री कार्यालय के प्रमुख रहे। इस पद पर उनका काम चालक दल की तैयारियों, अंतरिक्षयात्रियों को अभियानों में नियुक्त करने और उड़ान सुरक्षा से जुड़ा था। यानी उस दौरान उन्होंने एक अंतरिक्षयात्री के रूप में खुद अभियान पूरा करने से आगे बढ़कर अपने साथियों को अभियानों के लिए तैयार करने में योगदान दिया। प्रशासन का यह अनुभव उनके कक्षा में बिताए समय और प्रयोगशाला में आने वाली नई ज़िम्मेदारी के बीच एक कड़ी का काम करता है।

चाँद की उड़ान, जिसने अगले अध्याय का रास्ता खोला

1 अप्रैल को वाइज़मैन अपने तीन साथियों के साथ ओरायन अंतरिक्षयान में सवार होकर आर्टेमिस 2 अभियान पर रवाना हुए। दल में नासा की अंतरिक्षयात्री क्रिस्टीना कोच, कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के अंतरिक्षयात्री जेरेमी हैनसेन और नासा के अंतरिक्षयात्री विक्टर ग्लोवर शामिल थे। चारों ने 10 दिन की यात्रा में चाँद के उस हिस्से के पार चक्कर लगाया, जो पृथ्वी से दिखाई नहीं देता, फिर धरती पर लौट आए। अभियान के बारे में प्रकाशित जानकारी के मुताबिक, दल पृथ्वी से पहले के किसी भी मानवयुक्त अंतरिक्ष-अभियान के मुकाबले अधिक दूर तक गया था। हालाँकि, घोषणा में इस दूरी का कोई निश्चित आँकड़ा नहीं दिया गया।

आर्टेमिस 2 में चाँद की सतह पर उतरना शामिल नहीं था। इसका मकसद चाँद के आसपास मानवयुक्त उड़ान की जाँच करना और आगे के अभियानों की राह तैयार करना था। फिर भी, इस यात्रा के कुछ पल दल के सदस्यों के लिए निजी तौर पर बेहद खास रहे। वाइज़मैन ने उस दृश्य के बारे में बताया, जिसमें गहरे अंतरिक्ष से देखने पर सूरज चाँद के पीछे छिपता दिखाई दिया। धरती से उस नज़ारे को देखने का अनुभव वैसा नहीं हो सकता। वाइज़मैन के लिए यह दृश्य उनके सफ़र का अंत नहीं था; इससे कैलटेक और प्रयोगशाला के साथ अन्वेषण परियोजनाओं में योगदान देने की उनकी इच्छा और मज़बूत हुई।

चाँद की यह यात्रा वाइज़मैन के करियर में हुए बदलाव को समझने का संदर्भ देती है, लेकिन उनकी नई भूमिका को सिर्फ चंद्र-अभियान का प्रतीकात्मक विस्तार नहीं माना जाना चाहिए। आर्टेमिस 2 का ध्यान एक खास मानवयुक्त यात्रा पर था, जबकि जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी में कई तरह के रोबोटिक अभियान और अंतरिक्ष-संचार का काम होता है। फिर भी, जोखिम सँभालने, उड़ान की तैयारी करने और विशेषज्ञ टीमों के साथ काम करने का उनका अनुभव ऐसी संस्था में उपयोगी हो सकता है, जहाँ अलग-अलग विषयों के जानकारों को मिलकर काम करना पड़ता है।

दल के चारों सदस्यों ने चुनीं नई राहें

आर्टेमिस 2 के दल में वाइज़मैन आखिरी सदस्य हैं जिन्होंने सक्रिय अंतरिक्ष-उड़ानों से हटने के बाद अपने अगले पेशेवर पड़ाव की घोषणा की। सितंबर में उन्होंने और ग्लोवर ने बताया था कि वे अंतरिक्षयात्री के सक्रिय पद से हटकर मानद या आरक्षित अंतरिक्षयात्री का दर्जा ले रहे हैं। इसका अर्थ है कि वे अब सक्रिय अंतरिक्षयात्री सेवा में नहीं रहेंगे। इसके बाद ग्लोवर ने कैलिफ़ोर्निया स्टेट पॉलिटेक्निक यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष के कार्यकारी सलाहकार की नौकरी स्वीकार की। यह विश्वविद्यालय कैल पॉली के नाम से जाना जाता है और ग्लोवर ने वहीं से पढ़ाई की थी।

हैनसेन ने जुलाई में अपने करियर की दिशा बदलने की घोषणा की और बाद में कनाडा की रॉयल एयर फ़ोर्स के रिज़र्व दल में शामिल हो गए। कोच ने भी सक्रिय अंतरिक्ष-उड़ानों से दूरी बनाई और नासा में कार्यवाहक मुख्य अभियंता और उपाध्यक्ष बनीं। उनकी नई ज़िम्मेदारी 1 नवंबर से शुरू होनी थी। चारों की मंज़िलें अलग-अलग हैं, लेकिन सभी ने अंतरिक्ष-अभियानों की तैयारी से हटकर प्रबंधन, शिक्षा या सैन्य सेवा में नई भूमिकाएँ अपनाई हैं।

सक्रिय उड़ानों से हटने और अंतरिक्ष क्षेत्र से नाता तोड़ने में फर्क है। वाइज़मैन का फैसला अन्वेषण से दूर जाने का नहीं, बल्कि ऐसी भूमिका में जाने का है, जहाँ वह उन कामों को दिशा देने में मदद करेंगे, जो अंतरिक्ष-अभियानों को सहारा देते हैं। उनके साथियों के नए पद भी दिखाते हैं कि अंतरिक्षयात्री के तौर पर मिला अनुभव यान से बाहर कई कामों में उपयोगी हो सकता है—जैसे इंजीनियरिंग का प्रबंधन, सलाह देना या सैन्य सेवा जारी रखना। फिर भी, चारों के रास्ते अपने-अपने हैं; उनके बदलावों को एक जैसी प्रक्रिया नहीं समझना चाहिए।

नई नियुक्ति का प्रयोगशाला के अभियानों के लिए क्या अर्थ है

किसी नए अधिकारी की नियुक्ति से अपने आप यह साबित नहीं होता कि किसी खास अभियान की योजना बदल जाएगी। वाइज़मैन के आने से तकनीकी फैसलों या अभियानों की तारीखों में क्या बदलाव होंगे, इस बारे में घोषणा में कोई जानकारी नहीं दी गई। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि उनका अनुभव एक ऐसे संस्थान के प्रबंधन में जुड़ेगा, जो जटिल वैज्ञानिक काम सँभालता है—मंगल की सतह पर खोज करते रोवरों से लेकर बाहरी ग्रहों के चंद्रमाओं का अध्ययन करने वाले अभियानों और दूर के अंतरिक्षयानों से संकेत पाने वाले संचार नेटवर्क तक।

उनकी नई भूमिका ऐसे समय शुरू हो रही है, जब नासा आर्टेमिस कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है। एजेंसी का लक्ष्य 2027 के मध्य में आर्टेमिस 3 भेजने का है। यह परीक्षण उड़ान होगी, जिसमें ओरायन अंतरिक्षयान के साथ स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन के चंद्र-अवतरण यान—स्टारशिप और ब्लू मून—शामिल होंगे। योजनाएँ उम्मीद के मुताबिक आगे बढ़ीं तो यह अभियान आर्टेमिस 4 के लिए रास्ता तैयार करेगा। आर्टेमिस 4 का लक्ष्य 2028 में इस कार्यक्रम के तहत चाँद पर पहली मानवयुक्त लैंडिंग करना है। ये लक्ष्य की तय तारीखें हैं, इस बात की गारंटी नहीं कि हर चरण उसी समय पूरा होगा।

आर्टेमिस कार्यक्रम से इस तरह जुड़ने का यह मतलब नहीं कि वाइज़मैन प्रयोगशाला के अपने पद से चंद्र कार्यक्रम का प्रबंधन करेंगे। जिस संस्था में उन्हें नेतृत्व की भूमिका मिली है, उसकी अपनी ज़िम्मेदारियाँ और अभियान हैं। लेकिन आर्टेमिस 2 में काम करने से उन्हें यह प्रत्यक्ष समझ मिली है कि इंसानों को अंतरिक्ष में भेजने के लिए क्या-क्या करना पड़ता है। वहीं जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी का काम उन्हें रोबोटिक अन्वेषण की दुनिया के बीच ले जाएगा। इन दोनों अनुभवों को साथ रखकर अंतरिक्ष-अन्वेषण को एक अलग नज़र से देखा जा सकता है: अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले लोग, उन जगहों तक पहुँचने वाली मशीनें जहाँ चालक दल नहीं जा सकता और वे टीमें जो दोनों तरह के अभियानों को संभव बनाती हैं।

निष्कर्ष

30 नवंबर से रीड वाइज़मैन चाँद के चारों ओर उड़ान की कमान सँभालने के बाद जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी के उपनिदेशक और कैलटेक के उपाध्यक्ष के रूप में काम करेंगे। वह प्रयोगशाला के निदेशक डेव गैलाघर के साथ रणनीतिक दिशा और कामकाज सँभालने में योगदान देंगे। उनके अब तक के सफ़र में नौसेना की सेवा, अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर बिताए 165 दिन, कुल करीब 13 घंटे की दो अंतरिक्ष-चहलकदमियाँ और 10 दिन का आर्टेमिस 2 अभियान शामिल हैं। दल के चारों सदस्यों ने अपने करियर की नई राहें चुनी हैं। वाइज़मैन के लिए अगला पड़ाव ऐसी संस्था के नेतृत्व में योगदान देना है, जो रोबोटिक यानों से सौरमंडल की खोज करती है और उनसे संपर्क बनाए रखती है। यह बदलाव दिखाता है कि अंतरिक्षयात्रियों का अनुभव उड़ान पूरी होने के बाद भी अन्वेषण के काम आ सकता है।