आसान शब्दों में
दो दवा कंपनियाँ कैंसर के छह संभावित इलाज विकसित करने के लिए साथ आई हैं। ये इलाज अभी शुरुआती शोध के दौर में हैं और मरीजों पर आजमाए नहीं गए हैं। जर्मन कंपनी आगे चलकर कुछ इलाजों के विकास और बिक्री के अधिकार ले सकती है, लेकिन बड़ी रकम तभी मिलेगी जब तय पड़ाव पूरे होंगे।
2024 में शुरू हुए सहयोग का विस्तार
बोहरिंगर इंगेलहाइम और चीन की सिनो बायोफार्मास्यूटिकल, जिसे एसबीपी समूह के नाम से भी जाना जाता है, ने कैंसर के इलाज पर अपना सहयोग बढ़ाने के लिए नया समझौता किया है। इसमें शुरुआती दौर के छह जैविक उपचार कार्यक्रम शामिल हैं। ये अभी मरीजों पर होने वाले परीक्षणों से पहले के चरण में हैं, इसलिए इनके असर और सुरक्षा के बारे में अभी कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
दोनों कंपनियों के बीच सहयोग पहली बार नहीं हुआ है। अप्रैल 2024 में उन्होंने कैंसर के इलाज के क्षेत्र में शुरुआती साझेदारी की थी। उसके तहत एसबीपी समूह ने बोहरिंगर इंगेलहाइम की बनाई तीन दवाओं के विकास की जिम्मेदारी लेने पर सहमति जताई थी। नए समझौते से इस काम में छह और कार्यक्रम जुड़ेंगे। इसकी व्यवस्था ऐसी है कि बोहरिंगर इंगेलहाइम बाद के चरणों में किसी कार्यक्रम के अधिकार लेने का विकल्प चुन सकती है; सभी व्यावसायिक जिम्मेदारियाँ शुरुआत से ही अपने ऊपर लेना उसके लिए जरूरी नहीं है।
छह नए कार्यक्रम एसबीपी समूह की सहायक कंपनियों से आए हैं। इनमें से पाँच पूरी तरह समूह के स्वामित्व वाली कंपनी लानोवा मेडिसिन्स से जुड़े हैं, जबकि छठा बीजिंग टाइड फार्मास्यूटिकल से आया है। कंपनियों की घोषणा में इन कार्यक्रमों के लक्ष्यों या संभावित दवाओं के नाम नहीं बताए गए हैं। इसलिए उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना संभव नहीं कि हर कार्यक्रम किस तरह के कैंसर को निशाना बनाएगा या सभी कार्यक्रम विकास के एक ही स्तर पर हैं।
कंपनियों के मुताबिक, इस साझेदारी में चीन के समूह की शोध तकनीकों और शुरुआती दवा-विकास के अनुभव को बोहरिंगर इंगेलहाइम की दुनिया भर में फैली शोध और विकास क्षमता के साथ जोड़ा जाएगा। व्यावहारिक रूप से इसका अर्थ है कि संभावित दवाओं पर शुरुआती काम ऐसे माहौल में हो सकता है जहाँ इस चरण का अनुभव मौजूद है। अगर आगे के नतीजे उत्साहजनक रहे, तो उन्हें मरीजों पर परीक्षण, बड़े पैमाने पर निर्माण और अलग-अलग बाजारों तक पहुँचाने में व्यापक नेटवर्क का सहारा मिल सकता है।
दवाएँ ट्यूमर तक कैसे पहुँचेंगी और प्रतिरक्षा को कैसे जगाएँगी?
साझेदारी में ध्यान दिए जा रहे दो तरीकों में से एक है दवा से जुड़ी एंटीबॉडी, जिसे एडीसी कहा जाता है। आसान भाषा में, इसमें ऐसी एंटीबॉडी को दवा की एक शक्तिशाली मात्रा से जोड़ा जाता है जो कैंसर कोशिका पर मौजूद किसी खास पहचान को पकड़ सकती है। इस तरह दवा को निशाने वाली कोशिकाओं तक पहुँचाने में मदद मिल सकती है, बजाय इसके कि वह शरीर में बिना किसी खास निशाने के पहुँचे। लेकिन यह तरीका कितना सफल होगा, यह हर संभावित दवा की खासियतों पर निर्भर करता है—जैसे वह लक्ष्य को कितनी सही तरह पहचानती है, उससे जुड़ी दवा कितनी सुरक्षित है और उसकी खुराक कितनी उपयुक्त है। घोषणा से यह साबित नहीं होता कि छहों कार्यक्रम इन कसौटियों पर खरे उतरे हैं।
दूसरा तरीका है टी कोशिकाओं को ट्यूमर की ओर बुलाने वाले अणु, जिन्हें टीसीई कहा जाता है। ये अणु प्रतिरक्षा तंत्र की टी कोशिका और ट्यूमर कोशिका को जोड़ने वाली कड़ी बनाते हैं। इससे टी कोशिका कैंसर कोशिका के पास पहुँच सकती है और उस पर हमला करने के लिए सक्रिय हो सकती है। यह तरीका एंटीबॉडी के जरिए दवा की मात्रा पहुँचाने से अलग है, हालाँकि दोनों में ऐसे अणुओं की बनावट काम आती है जो खास लक्ष्यों को पहचान सकते हैं। इस साझेदारी में दोनों तरह के कार्यक्रम शामिल होने से कैंसर से निपटने के तरीकों में विविधता आती है, लेकिन इससे मरीजों में असर का पहले से कोई प्रमाण नहीं मिलता।
बोहरिंगर इंगेलहाइम कैंसर के क्षेत्र में अपनी कोशिशों को कैंसर कोशिकाओं पर सीधे निशाना साधने वाले इलाजों और प्रतिरक्षा-आधारित इलाजों, दोनों तक फैला हुआ बताती है। इस संदर्भ में छह कार्यक्रम अलग-अलग आणविक लक्ष्यों और तकनीकों के जरिए संभावित दवाओं की उसकी सूची बढ़ा सकते हैं। फिर भी यहाँ «संभावना» शब्द अहम है: ये इलाज अभी मरीजों पर परीक्षण से पहले के चरण में हैं। नई दवाओं के मानव परीक्षणों के नतीजे घोषित नहीं किए गए हैं और यह भी तय नहीं कि सभी कार्यक्रम मरीजों पर परीक्षण तक पहुँचेंगे।
विकास का खर्च कौन उठाएगा और अधिकार किसे मिलेंगे?
समझौते के अनुसार, एसबीपी समूह इन कार्यक्रमों के शुरुआती विकास की देखरेख करेगा। घोषणा में जिन नैदानिक पड़ावों का विस्तार से ब्योरा नहीं दिया गया है, उन्हें पार करने के बाद बोहरिंगर इंगेलहाइम यह तय कर सकती है कि वह किसी कार्यक्रम के विकल्प का इस्तेमाल करके उसके विकास, निर्माण और विपणन के विशेष अधिकार लेगी या नहीं। इस व्यवस्था से जर्मन कंपनी को आगे के विकास की जिम्मेदारी लेने से पहले तय पड़ावों पर हर कार्यक्रम का आकलन करने का मौका मिलता है। वहीं चीनी समूह की शुरुआती काम में स्पष्ट भूमिका बनी रहती है।
संभावित अधिकारों का भौगोलिक दायरा सभी कार्यक्रमों के लिए एक जैसा नहीं है। छह में से चार कार्यक्रमों के लिए अधिकार चीन, हांगकांग और मकाऊ के बाहर के बाजारों तक फैल सकते हैं। बाकी दो कार्यक्रमों के अधिकार दुनिया भर के लिए हो सकते हैं। इसका यह मतलब नहीं कि दवाएँ उन जगहों पर उपलब्ध हो चुकी हैं। ये सीमाएँ केवल यह बताती हैं कि समझौते की शर्तों के तहत विकल्प का इस्तेमाल करने पर बोहरिंगर इंगेलहाइम को संभावित अधिकार किन क्षेत्रों में मिल सकते हैं।
घोषित भुगतान में 358 मिलियन डॉलर की शुरुआती और निकट भविष्य में दी जाने वाली रकम शामिल है। इसके अलावा, अलग-अलग पड़ाव पूरे होने पर 7 अरब डॉलर तक का भुगतान किया जा सकता है। इन पड़ावों में विकल्पों का इस्तेमाल, विकास में आगे बढ़ना, नियामक मंजूरियाँ हासिल करना और व्यावसायिक लक्ष्य पूरे करना शामिल है। इसलिए अधिकतम बताई गई रकम कोई तय भुगतान नहीं है जो कंपनी अभी दे रही हो; वह भविष्य की उपलब्धियों और घटनाओं पर निर्भर ऊपरी सीमा है। अगर संभावित दवाएँ बाजार तक पहुँचती हैं, तो उनकी बिक्री के आधार पर बोहरिंगर इंगेलहाइम क्रमशः बढ़ने वाली रॉयल्टी भी देगी।
इस तरह शुरुआती भुगतान और शर्तें पूरी होने पर मिलने वाली रकम को जोड़ने पर घोषित कुल राशि 7.358 अरब डॉलर से अधिक हो सकती है। इसके साथ बिक्री पर आधारित संभावित रॉयल्टी भी जुड़ सकती है। ये आँकड़े वैज्ञानिक और व्यावसायिक स्तर पर लगाए जा रहे बड़े दांव को दिखाते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि छहों दवाएँ सफल होंगी या पूरी रकम दी ही जाएगी। हर कार्यक्रम को शोध और विकास, मरीजों पर परीक्षण और नियामकीय समीक्षा के कई चरण पार करने होंगे, तभी वह इस्तेमाल के लिए उपलब्ध इलाज बन सकता है।
चीन बना नई दवा खोजने की रणनीति का अहम हिस्सा
यह समझौता चीन की दवा-नवाचार व्यवस्था से रिश्ते मजबूत करने की बोहरिंगर इंगेलहाइम की कोशिश का हिस्सा है। अक्टूबर में कंपनी ने शंघाई के झांगजियांग इलाके में शोध और विकास केंद्र खोला था। कंपनी के अनुसार, इस केंद्र का उद्देश्य शुरुआती नैदानिक विकास और बाहरी नवाचार की क्षमता बढ़ाना है। इसके जरिए वह अपने वैश्विक शोध और विकास नेटवर्क को चीन में हो रहे नवाचार से जोड़ना चाहती है।
यह नया सहयोग दिखाता है कि बड़ी दवा कंपनियाँ संभावित इलाजों के नए स्रोत पाने के लिए साझेदारियों का सहारा कैसे ले सकती हैं, बजाय इसके कि वे केवल अपने संस्थानों में विकसित कार्यक्रमों पर निर्भर रहें। इस मामले में चीनी समूह की कंपनियाँ संभावित दवाएँ, शोध मंच और शुरुआती चरणों का अनुभव दे रही हैं। बोहरिंगर इंगेलहाइम के पास विकल्प है कि वह उन कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने का फैसला करे और उन्हें बड़े पैमाने के वैश्विक विकास तक ले जाए। उपलब्ध जानकारी में हर कार्यक्रम के व्यावहारिक ब्योरे—जैसे उसका आणविक लक्ष्य और नैदानिक परीक्षणों की योजना—नहीं बताए गए हैं।
एसबीपी समूह की अध्यक्ष टेरेसा त्से ने इस सहयोग को समूह की अंतरराष्ट्रीय रणनीति का अहम कदम बताया। उनके मुताबिक, यह कैंसर के आधुनिक इलाजों में समूह की वैज्ञानिक क्षमता पर भरोसे को भी दिखाता है। उन्होंने वैश्विक साझेदारों का दायरा बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा में चीन के नवाचारों का योगदान करने की समूह की इच्छा का भी जिक्र किया। ये बातें कंपनियों की दिशा और महत्वाकांक्षा बताती हैं; ये इस बात का नतीजा या प्रमाण नहीं हैं कि संभावित इलाज सफल होंगे या मरीजों तक पहुँचेंगे।
पहली साझेदारी की तीन दवाएँ बताती हैं शोध का दायरा
2024 की पहली साझेदारी में शामिल तीन दवाएँ दोनों कंपनियों के शोध की विविधता समझने में मदद करती हैं। लेकिन वे छह नई संभावित दवाओं से अलग हैं, जो अभी मरीजों पर परीक्षण से पहले के चरण में हैं। उन तीन में से एक है ब्रिगिमाडलिन, जिसे बीआई 907828 के नाम से भी जाना जाता है। यह एमडीएम2 और पी53 नाम के दो प्रोटीनों के बीच होने वाली क्रिया को निशाना बनाती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, घोषणा से एक साल पहले बोहरिंगर ने इसके सभी तरह के उपयोगों के लिए विकास रोक दिया था। इसकी वजह ब्राइटलाइन-1 नाम के दूसरे/तीसरे चरण के परीक्षण का असफल होना था। इस परीक्षण में अलग-अलग तरह के वसा-ऊतक सार्कोमा से पीड़ित 400 मरीज शामिल थे। बीमारी को बढ़ने से रोकने में दवा डॉक्सोरूबिसिन से बेहतर साबित नहीं हुई।
दूसरी दवा ओब्रीक्सामिग है, जिसे बीआई 764532 भी कहते हैं। यह दो लक्ष्यों से जुड़ने वाला अणु है: यह डेल्टा-लाइक लिगैंड 3 यानी डीएलएल3 को पहचानता है और टी कोशिकाओं पर मौजूद सीडी3 से भी जुड़ता है। इस वजह से यह टी कोशिकाओं को ट्यूमर की ओर बुलाने वाली दवाओं की श्रेणी में आता है। इसका अध्ययन दूसरे चरण के डेयरिऑन-5 परीक्षण में किया जा रहा है। इस परीक्षण में खुराक चुनने और दवा का आगे आकलन करने के लिए उन मरीजों को शामिल किया गया है जिनका छोटा-कोशिका फेफड़ों का कैंसर लौट आया है या इलाज के बावजूद बढ़ा है। इसमें फेफड़ों के बाहर के न्यूरोएंडोक्राइन कैंसर और बड़े-कोशिका न्यूरोएंडोक्राइन फेफड़ों के कैंसर के मरीज भी शामिल हैं।
बोहरिंगर ने डेयरिऑन-9 नाम के पहले चरण के बी परीक्षण से ओब्रीक्सामिग और टोपोटेकन के संयोजन पर सकारात्मक आँकड़े भी घोषित किए थे। इस परीक्षण में व्यापक फैलाव वाले छोटे-कोशिका फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित वयस्क शामिल थे। हालाँकि, घोषणा में सुधार की मात्रा के बारे में कोई संख्यात्मक जानकारी नहीं दी गई थी। इसलिए उपलब्ध सूचना के आधार पर इस संयोजन से हुए लाभ का आकार बताना संभव नहीं है।
तीसरी दवा ज़ोंगर्टिनिब है। यह एचईआर2 रिसेप्टर को चुनिंदा ढंग से रोकती है और टायरोसिन किनेज़ वाले हिस्से से स्थायी रूप से जुड़ती है। इसमें वे रिसेप्टर भी शामिल हैं जिनमें बदलाव आ चुका है, जैसे एक्सॉन 20 में होने वाला बदलाव। इसका तीसरे चरण के बीमिऑन लंग-3 परीक्षण में आकलन किया जा रहा है। इस परीक्षण में इसकी तुलना मानक सहायक इलाज से की जा रही है। इसमें ऐसे वयस्क शामिल हैं जिनके ट्यूमर को सर्जरी से पूरी तरह निकाल दिया गया है और जिन्हें दूसरे से लेकर तृतीय-बी चरण तक का गैर-छोटा-कोशिका फेफड़ों का कैंसर है। उनके एचईआर2 रिसेप्टर के टायरोसिन किनेज़ वाले हिस्से में सक्रिय करने वाला बदलाव भी मौजूद है। ये उदाहरण दिखाते हैं कि पहले सहयोग में अलग-अलग लक्ष्य और इलाज के तरीके शामिल थे, लेकिन उनसे छह नए कार्यक्रमों की पहचान अपने-आप नहीं पता चलती।
शेयर बाजार की प्रतिक्रिया और उसकी सीमाएँ
घोषणा के बाद हांगकांग शेयर बाजार में एसबीपी समूह के शेयरों में तेजी आई। उनकी कीमत लगभग 5% बढ़ी—4.885 हांगकांग डॉलर, यानी करीब 61 अमेरिकी सेंट, से बढ़कर 5.15 हांगकांग डॉलर, यानी लगभग 65 अमेरिकी सेंट हो गई। बोहरिंगर इंगेलहाइम निजी कंपनी है, इसलिए उसके शेयर बाजार में कारोबार नहीं करते और साझेदारी पर निवेशकों की प्रतिक्रिया की तुलना के लिए उसके शेयर का भाव उपलब्ध नहीं है।
शेयर की बढ़त को संभावित बड़ी रकम और कार्यक्रमों की संख्या को लेकर बाजार की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा सकता है, न कि इन दवाओं की वैज्ञानिक सफलता के फैसले के रूप में। निवेशक संभावित वित्तपोषण, साझेदारियों और भविष्य में मिलने वाले विकास अधिकारों को महत्व दे सकते हैं। लेकिन किसी इलाज का आकलन करने के लिए प्रयोगशाला और मरीजों पर परीक्षणों के आँकड़े, साथ ही लाभ और जोखिम की विस्तृत जानकारी जरूरी होती है। छह संभावित दवाओं में से हर एक के सफल होने की संभावना का अनुमान लगाने लायक ब्योरा अभी घोषित नहीं किया गया है।
निष्कर्ष
बोहरिंगर इंगेलहाइम और एसबीपी समूह का नया समझौता 2024 में शुरू हुए सहयोग में मरीजों पर परीक्षण से पहले के छह जैविक उपचार कार्यक्रम जोड़ता है। इसके तहत जर्मन कंपनी को अलग-अलग कार्यक्रमों और क्षेत्रों के लिए विकास, निर्माण और विपणन के विशेष अधिकार लेने के विकल्प मिल सकते हैं। शुरुआती और निकट भविष्य के भुगतान 358 मिलियन डॉलर हैं; पड़ाव पूरे होने पर रकम 7 अरब डॉलर तक पहुँच सकती है और बिक्री होने पर क्रमशः बढ़ने वाली रॉयल्टी भी देनी होगी। यह साझेदारी चीन की शोध क्षमता और वैश्विक स्तर पर दवा विकसित करने के अनुभव को जोड़ती है, साथ ही दवा से जुड़ी एंटीबॉडी और टी कोशिकाओं को ट्यूमर की ओर बुलाने वाले तरीकों पर काम बढ़ाती है। फिर भी इन संभावित इलाजों की असली अहमियत आगे के परीक्षण तय करेंगे: वे अभी शुरुआती चरण में हैं और बड़े समझौते का मूल्य इस बात की गारंटी नहीं कि कोई दवा सफल होगी।