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चाँद पर उतरने से पहले अंतरिक्ष में होगी बड़ी परीक्षा

आसान शब्दों में

नासा अभी यह तय नहीं कर रही कि चाँद पर लोगों को उतारने के लिए किस कंपनी का यान चुना जाए। आर्टेमिस 3 में पहले ओरायन दोनों कंपनियों के यानों के पास जाकर उनसे जुड़ने की कोशिश करेगा। इस उड़ान में कोई चाँद पर नहीं उतरेगा, लेकिन इससे मिली जानकारी आगे की चंद्र-यात्रा की तैयारी और सुरक्षा में मदद करेगी।

चयन से पहले की अहम परीक्षा

आर्टेमिस 3 अब चाँद पर उतरने की यात्रा नहीं, बल्कि करीब दो हफ्ते तक चलने वाली एक अहम परीक्षा है। पृथ्वी के चारों ओर की कक्षा में होने वाले इस परीक्षण से यह तय करने में मदद मिल सकती है कि नासा भविष्य में चाँद पर उतरने के लिए किस यान पर भरोसा करेगी। योजना के केंद्र में नासा का ओरायन अंतरिक्षयान है। वह पहले ब्लू ओरिजिन के ब्लू मून यान से और फिर स्पेसएक्स के स्टारशिप से जुड़ने की कोशिश करेगा। इस परीक्षण के नतीजे 2028 के लिए तय मिशन को प्रभावित करेंगे, लेकिन दोनों कंपनियां उसी साल चाँद पर उतरने की अपनी योजनाओं पर काम जारी रख सकती हैं।

चयन से पहले की अहम परीक्षा

नासा आर्टेमिस 3 को एक निर्णायक पड़ाव मान रही है। इसके बाद ही वह आर्टेमिस 4 में चाँद पर उतरने के लिए दोनों में से किसी एक यान को चुन सकती है। नासा प्रमुख जारेड आइज़ैकमैन के मुताबिक, इस मिशन से मिली जानकारी आगे की चंद्र-यात्राओं के लिए दोनों विकल्पों में अंतर समझने में मदद करेगी। हालांकि, नासा जल्दबाजी में फैसला नहीं करना चाहती। आइज़ैकमैन ने कहा है कि एजेंसी फैसला जितना हो सके देर से करेगी, ताकि वह अनुमानों और योजनाओं के बजाय परीक्षण से मिले असली आँकड़ों का इस्तेमाल कर सके।

आर्टेमिस 4 के तहत 2028 में इंसानों को फिर से चाँद की सतह पर ले जाने की योजना है। उन्हें वहाँ कौन-सा यान पहुँचाएगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आर्टेमिस 3 में दोनों चाँद पर उतरने वाले यान क्या कर पाते हैं। फिर भी, मुकाबले का मतलब यह नहीं है कि जिस कंपनी का यान नहीं चुना जाएगा, वह अपनी तैयारी रोक देगी। आर्टेमिस कार्यक्रम के निदेशक जेरेमी पार्सन्स ने बताया कि दोनों कंपनियां 2028 में चाँद पर उतरने के अभियानों की योजना बना रही हैं। यानी, दोनों ओर विकास का काम जारी रह सकता है, जबकि आर्टेमिस 4 में नासा इनमें से केवल एक यान को चुनेगी।

मिशन की बदली हुई रूपरेखा को समझना जरूरी है, क्योंकि इससे पता चलता है कि परीक्षा में क्या-क्या होगा। पहले आर्टेमिस 3 को अंतरिक्ष यात्रियों को चाँद की सतह तक ले जाने वाली उड़ान के रूप में तय किया गया था। फिर इस साल की शुरुआत में नासा ने इसे बदलकर पृथ्वी के चारों ओर करीब दो हफ्ते तक चलने वाले जटिल परीक्षण में ढाल दिया। इस उड़ान में चालक दल चाँद की सतह पर नहीं जाएगा। स्टारशिप से जुड़ने की परीक्षा के दौरान भी अंतरिक्ष यात्री उसके भीतर प्रवेश नहीं करेंगे। इसके बजाय, नासा यानों के एक-दूसरे के पास पहुँचने और उनकी प्रणालियों के कामकाज की जानकारी जुटाएगी, ताकि बाद में अंतरिक्ष यात्रियों को चाँद पर उतारने की कोशिश से पहले जरूरी प्रक्रियाएँ परखी जा सकें।

एक के बाद एक तीन अंतरिक्षयान

योजना के मुताबिक, सबसे पहले ब्लू ओरिजिन का ब्लू मून यान उसके न्यू ग्लेन रॉकेट से अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। कक्षा में पहुँचने के बाद यान की जाँच होगी, ताकि पता चल सके कि वह परीक्षण शुरू करने के लिए तैयार है या नहीं। इसके बाद ओरायन को अंतरिक्ष प्रक्षेपण प्रणाली वाले रॉकेट पर रवाना किया जाएगा, जिसे संक्षेप में एसएलएस कहा जाता है। कार्यक्रम की योजना है कि इन चरणों का तालमेल इस तरह रखा जाए कि ब्लू मून की पहली उड़ान के बाद ओरायन जल्द से जल्द रवाना हो सके।

इस क्रम को पूरा करने के लिए एक ही समय-सारिणी के तहत कई रॉकेटों और अंतरिक्षयानों का इस्तेमाल होगा। कक्षा में अलग-अलग प्रक्षेपणों के बीच सटीक तालमेल भी जरूरी होगा। आर्टेमिस 3 का लक्ष्य चाँद तक जाने के बजाय पृथ्वी के पास की कक्षा में परीक्षण करना तय होने के बाद एसएलएस रॉकेट में बदलाव किए गए। उसका ऊपरी चरण हटा दिया गया, क्योंकि ओरायन को तय कक्षा से आगे धकेलने की जरूरत नहीं होगी। पार्सन्स ने समझाया कि रॉकेट का मुख्य चरण ऊपरी चरण का इस्तेमाल किए बिना ही यान को उस कक्षा तक पहुँचा सकता है।

ब्लू मून के प्रक्षेपण के तीन दिन बाद ओरायन उससे जुड़ने की कोशिश करेगा। इसके बाद चालक दल दो दिन तक दोनों यानों की दिशा तय करने, रास्ता खोजने और संपर्क करने वाली प्रणालियों की जाँच करेगा। यह सिर्फ अंतरिक्ष में दो यानों को पास लाने का अभ्यास नहीं है। इससे नासा यह परख सकेगी कि भविष्य के मिशन में जरूरी अलग-अलग प्रणालियाँ एक साथ कैसे काम करती हैं। साथ ही, ओरायन के चाँद पर उतरने वाले यान के पास रहते हुए संपर्क करने, अपनी जगह का पता लगाने और यान की गति को नियंत्रित करने की क्षमता भी जाँची जाएगी।

मिशन के छठे दिन स्टारशिप को प्रक्षेपित करने की योजना है। उससे मिलने की कोशिश से पहले ओरायन ब्लू मून से अलग होगा और अपनी कक्षा बदलेगा। फिर वह स्पेसएक्स के यान से जुड़ने का प्रयास करेगा। स्टारशिप की परीक्षा के लिए समय अपेक्षाकृत कम होगा—करीब दो घंटे। इस दौरान आर्टेमिस 3 के अंतरिक्ष यात्री स्टारशिप में दाखिल नहीं होंगे। उनकी गतिविधि जुड़ने की प्रक्रिया और उससे संबंधित जाँच तक सीमित रहेगी। इसके बाद ओरायन और उसका चालक दल मिशन के बाकी काम जारी रखेंगे।

परीक्षणों का यह क्रम इसलिए बनाया गया है ताकि नासा एक ही उड़ान में दोनों यानों को परख सके और ओरायन को हर यान के साथ अलग-अलग काम करने का मौका मिले। मकसद केवल यह दिखाना नहीं है कि कोई यान कक्षा तक पहुँच सकता है। नासा यह भी जाँचना चाहती है कि यान आपस में कैसे जुड़ते हैं, संपर्क कैसे करते हैं और उनकी दिशा व रास्ते को कैसे नियंत्रित किया जाता है। स्टारशिप की परीक्षा पूरी होने के बाद भी ओरायन और उसके चालक दल के पास पृथ्वी लौटने से पहले दूसरे उद्देश्यों के लिए कुछ दिन होंगे। वे क्या काम कर पाएँगे, यह उड़ान की योजना पर निर्भर करेगा।

समय में गुंजाइश और चालक दल की जानकारी

आर्टेमिस 3 की आदर्श अवधि 14 दिन रखी गई है, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे 17 दिन तक बढ़ाया जा सकता है। इससे परीक्षण की जरूरतों के हिसाब से समय में बदलाव की गुंजाइश रहती है और साथ ही पृथ्वी वापसी भी योजना का जरूरी हिस्सा बनी रहती है। जो दिन यानों से जुड़ने की प्रक्रिया के लिए तय नहीं होंगे, उनमें अतिरिक्त लक्ष्य पूरे किए जा सकते हैं। फिर भी, मिशन की गतिविधियाँ एक तय कार्यक्रम के तहत होंगी; यह उड़ान बिना क्रम के कई अभ्यास करने की खुली छूट नहीं है।

दोनों यानों का आकलन करने के साथ-साथ इस मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों की सेहत से जुड़ी अहम जानकारी भी जुटाई जाएगी। इस तरह आर्टेमिस 3 चंद्र-यात्रा की तैयारी के कई पहलुओं को परखेगा: अंतरिक्ष में यानों का प्रदर्शन, पास आने और जुड़ने की प्रक्रियाओं की क्षमता और अपेक्षाकृत लंबी उड़ान के दौरान चालक दल की सेहत। पार्सन्स के अनुसार, मिशन के दिनों की योजना इस तरह बनाई गई है कि परीक्षण जोखिम घटाने में मदद करें, वैज्ञानिक जानकारी दें और चाँद पर उतरने की कोशिश से पहले कार्यक्रम की क्षमताओं का आकलन करने में मदद करें।

इन लक्ष्यों से समझ आता है कि आर्टेमिस 3 में चाँद पर न उतरना उसकी अहमियत कम होने का संकेत नहीं है। नई योजना का ध्यान चाँद की सतह पर उतरने के बजाय उन चरणों को परखने पर है, जिनकी सफलता आगे के चंद्र-मिशन के लिए जरूरी हो सकती है। अगर जुड़ने की प्रक्रिया या किसी प्रणाली में दिक्कत सामने आती है, तो नासा को चाँद पर उतरने वाले चालक दल को भेजने से पहले उस पर काम करने का मौका मिलेगा। अंतरिक्ष यात्रियों की सेहत से जुड़ी जानकारी इस परीक्षा को यानों की जाँच से आगे ले जाती है।

ब्लू ओरिजिन और स्पेसएक्स के सामने विकास की चुनौतियाँ

मिशन का समय दोनों यानों और रॉकेटों की तैयारी पर निर्भर करेगा। मई में एक रॉकेट के विस्फोट के बाद से न्यू ग्लेन ने उड़ान नहीं भरी है। ब्लू ओरिजिन को उम्मीद है कि नवंबर में वह फिर से प्रक्षेपण शुरू कर सकेगी। फिलहाल, नासा के पास ब्लू मून को किसी दूसरे रॉकेट से अंतरिक्ष में भेजने की वैकल्पिक योजना नहीं है। इसलिए न्यू ग्लेन का तैयार होना आर्टेमिस 3 के पूरे क्रम के लिए खास अहमियत रखता है, क्योंकि मौजूदा योजना में कंपनी का चाँद पर उतरने वाला यान इसी रॉकेट से जाएगा।

दूसरी ओर, पार्सन्स ने कहा कि आर्टेमिस 3 में परीक्षण के लिए ब्लू ओरिजिन जिस यान के नमूने का इस्तेमाल करेगी, उसका डिज़ाइन अच्छी तरह आगे बढ़ रहा है। नासा ने डिज़ाइन की समीक्षा में हिस्सा लिया है और यान के हिस्से अमेरिका के अलग-अलग ठिकानों से एक जगह इकट्ठा किए जा रहे हैं। इससे डिज़ाइन और हिस्सों को जोड़ने के काम में हुई प्रगति का पता चलता है। लेकिन इससे न्यू ग्लेन की उड़ान दोबारा शुरू करने की चुनौती खत्म नहीं होती, न ही यह साबित होता है कि कक्षा में परीक्षण अब पक्का हो गया है।

स्पेसएक्स अगले महीने स्टारशिप का एक और परीक्षण करने का लक्ष्य रख रही है। इसमें रैप्टर इंजनों के नए रूप को शामिल किया जाएगा। इससे पहले की परीक्षण उड़ानों में यान को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा था, जिनमें उड़ान के दौरान कई विस्फोट भी शामिल हैं। फिर भी, हाल के एक परीक्षण में स्टारशिप यान पहली बार कक्षा में पहुँचने में कामयाब हुआ। यह उपलब्धि आर्टेमिस 3 में उसकी भागीदारी की तैयारी की दिशा में प्रगति है, लेकिन सिर्फ कक्षा तक पहुँचने से यह तय नहीं होता कि यान मिशन के लिए जरूरी जुड़ने की प्रक्रिया कर पाएगा या नहीं।

दोनों कंपनियों की तकनीकी और कामकाज से जुड़ी चुनौतियाँ अलग-अलग हैं, लेकिन नासा को दोनों ही मामलों में ऐसे यान और रॉकेट चाहिए जो तय क्रम में मिशन की जरूरतें पूरी कर सकें। ब्लू मून के लिए पहले न्यू ग्लेन से प्रक्षेपण, फिर यान की जाँच और उसके बाद ओरायन के पास पहुँचना जरूरी है। स्टारशिप के मामले में क्रम यह है कि छठे दिन उसका प्रक्षेपण हो, ओरायन पहले ब्लू मून से जुड़ने की परीक्षा पूरी कर चुका हो और फिर वह दूसरी बार जुड़ने के लिए सही कक्षा में पहुँचे। इसलिए केवल घोषित योजनाएँ काफी नहीं हैं; असली मिशन में होने वाली परीक्षा ही बताएगी कि ये प्रणालियाँ साथ मिलकर काम कर सकती हैं या नहीं।

आर्टेमिस 3 के नतीजों से क्या तय होगा?

परीक्षण का नतीजा केवल यह तुलना नहीं होगा कि दोनों यानों में से किसका डिज़ाइन बेहतर है। इस उड़ान में ओरायन दोनों यानों के साथ काम करने वाला बीच का यान होगा। इससे नासा की टीमें उन कई प्रक्रियाओं का आकलन कर पाएँगी जिन्हें चाँद की सतह पर अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाने वाली उड़ान से पहले सफल होना होगा। एजेंसी दिशा तय करने, संपर्क करने और रास्ता खोजने वाली प्रणालियों के प्रदर्शन समेत जुटाए गए आँकड़ों को देखेगी और आगे के मिशनों से जुड़े फैसलों में उनका इस्तेमाल करेगी। आइज़ैकमैन ने जोर दिया है कि आर्टेमिस कार्यक्रम की योजना को आँकड़ों और हालात के अनुसार बदला जा सकेगा; उसे ऐसी तयशुदा योजना नहीं माना जाएगा जिसमें बदलाव की गुंजाइश न हो।

इसी दौरान, आर्टेमिस 4 के ओरायन यान के अंतरिक्ष यात्रियों वाले हिस्से और सेवा वाले हिस्से को जोड़ने और जाँचने का काम शुरू हो चुका है। इससे पता चलता है कि आर्टेमिस 3 की तैयारी के साथ-साथ अगले मिशन पर भी काम हो रहा है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि नासा परीक्षण से मिली सीख को दरकिनार करेगी। एजेंसी का कहना है कि वह आँकड़ों के आधार पर फैसले लेती रहेगी और नतीजों के मुताबिक अपनी योजना बदलेगी। इस तरह 2028 की ओर बढ़ने में दो काम साथ-साथ चलेंगे: अगले मिशन के लिए ओरायन तैयार करना और चाँद पर उतरने वाला यान चुनने में मदद देने वाले व्यावहारिक सबूत जुटाना।

समय को देखते हुए इस तालमेल का महत्व और साफ हो जाता है। आर्टेमिस 3 के प्रक्षेपण की तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन आइज़ैकमैन के मुताबिक उड़ान 2027 की गर्मियों में होने की उम्मीद है। उससे पहले शुरुआती तैयारियों को आगे बढ़ना होगा: ब्लू ओरिजिन की उम्मीद के मुताबिक न्यू ग्लेन को फिर उड़ान भरनी होगी, स्पेसएक्स को स्टारशिप के परीक्षण जारी रखने होंगे और फिर मिशन में शामिल यानों व रॉकेटों के प्रक्षेपणों का सही तालमेल बनाना होगा। जब तक ये चरण पूरे नहीं होते, तैयारियों में हुई असली प्रगति और परीक्षणों से मिलने वाली जानकारी ही आगे की दिशा तय करने में अहम रहेगी।

निष्कर्ष

आर्टेमिस 3 अब पृथ्वी के चारों ओर की कक्षा में होने वाली दोहरी परीक्षा है, जिसके नतीजे 2028 में इंसानों को फिर चाँद पर ले जाने वाले आर्टेमिस 4 के लिए चाँद पर उतरने वाला यान चुनने में मदद कर सकते हैं। ओरायन पहले ब्लू मून और फिर स्टारशिप से जुड़ने की कोशिश करेगा। आदर्श रूप से 14 दिन चलने वाला यह मिशन जरूरत पड़ने पर 17 दिन तक बढ़ाया जा सकता है और इसमें यानों की प्रणालियों के साथ चालक दल की सेहत से जुड़ी जानकारी भी जुटेगी। दोनों कंपनियों को प्रक्षेपण और परीक्षणों की चुनौतियों से पार पाना है। नासा का कहना है कि वह फैसला जितना हो सके देर से करेगी और अपने कदम परीक्षण से मिले सबूतों के आधार पर तय करेगी। इससे आर्टेमिस 3 योजनाओं को आगे की चंद्र-यात्रा के लिए काम आने वाली जानकारी में बदलने वाली अहम परीक्षा बन जाती है।