आसान शब्दों में
आर्टेमिस 3 में अंतरिक्ष यात्री चाँद पर नहीं उतरेंगे। वे धरती के पास रहकर ओरायन और चाँद पर उतरने के लिए बनाए जा रहे दो यानों को जोड़ने और चलाने की जाँच करेंगे। इससे नासा को अगली चंद्र-यात्रा से पहले कमियाँ पहचानने में मदद मिलेगी। चाँद पर उतरने वाले यान और उड़ान की तारीख, दोनों का फैसला अभी बाकी है।
चाँद पर उतरने से पहले कक्षा में परीक्षा
नासा ने 23 अक्टूबर 2026 को आर्टेमिस 3 की विस्तृत योजना सामने रखी। पहली नज़र में यह मिशन चाँद की ओर बढ़ने के रास्ते में एक अभ्यास पड़ाव लगता है, न कि चाँद पर उतरने वाली उड़ान। योजना के मुताबिक, यह मिशन धरती की निचली कक्षा में होगा। इसमें अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाने वाला ओरायन यान, ब्लू ओरिजिन और स्पेसएक्स द्वारा बनाए जा रहे चाँद पर उतरने वाले दो यानों के साथ मिलने और जुड़ने की प्रक्रिया आज़माएगा। इसका मकसद ऐसा व्यावहारिक अनुभव जुटाना है, जिससे अगली बार चाँद पर उतरने का जोखिम घटाया जा सके। हालाँकि, उड़ान की तारीख और योजना के कई अहम हिस्से अब भी समय-सारिणी और सामान की आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों पर निर्भर हैं।
जोखिम भरी चंद्र-उतराई से पहले कक्षा में अभ्यास
नासा की योजना समझने के लिए दोनों मिशनों का फर्क जानना ज़रूरी है। घोषित योजना के अनुसार, आर्टेमिस 3 चाँद की सतह तक जाने वाला अभियान नहीं, बल्कि धरती के पास की कक्षा में किया जाने वाला मानव-सहित परीक्षण है। इसके बाद आर्टेमिस 4 का लक्ष्य 2028 में चाँद के दक्षिणी ध्रुव के पास अंतरिक्ष यात्रियों को उतारना है, बशर्ते तैयारियाँ उम्मीद के मुताबिक आगे बढ़ें। इस तरह तीसरा मिशन एक बड़े अभ्यास की भूमिका निभाएगा। इसमें इंजीनियर और अंतरिक्ष यात्री जाँचेंगे कि अलग-अलग यान एक-दूसरे के पास पहुँच सकते हैं, जुड़ सकते हैं और साथ मिलकर काम कर सकते हैं या नहीं। इससे पहले कि कहीं अधिक दूर और जटिल अभियान की कोशिश की जाए, यह जाँच बहुत काम की होगी।
इस तरीके की अहमियत ओरायन और चाँद पर उतरने वाले यानों के अलग-अलग काम और बनावट से भी जुड़ी है। ओरायन को धरती से बहुत दूर अंतरिक्ष की यात्राओं के लिए बनाया गया है, जबकि यह परीक्षण धरती की कक्षा के ऐसे माहौल में होगा जहाँ तापमान की परिस्थितियाँ अलग हैं। नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम के निदेशक जेरेमी पार्सन्स ने कहा कि तापमान को संभालना उन बातों में से है जिन पर खास ध्यान देना होगा। इसी वजह से योजना में उड़ान के बाद ओरायन की कक्षा बदलने की बात शामिल है। इस चरण में यान के तंत्रों को असली उड़ान जैसी परिस्थितियों में परखा जा सकेगा। साथ ही, कोई समस्या आने पर चालक दल के पास अपेक्षाकृत जल्दी धरती लौटने का विकल्प भी रहेगा।
एक अभियान में तीन प्रक्षेपण यान
मौजूदा योजना में फ्लोरिडा के अंतरिक्ष तट से तीन यान उड़ान भरेंगे: ब्लू ओरिजिन का न्यू ग्लेन, नासा का स्पेस लॉन्च सिस्टम और फिर स्पेसएक्स का स्टारशिप। इसका अर्थ है कि यह ऐसा मिशन नहीं होगा जिसमें एक ही उड़ान के बाद चालक दल कक्षा में पहुँच जाए। इसके बजाय, मिशन में कई उड़ानें और यानों के बीच मुलाकातें होंगी, जिनका समय और कामकाज एक-दूसरे से मेल खाना चाहिए। पार्सन्स ने इस अभियान को बेहद जटिल बताया है, क्योंकि हर चरण की सफलता संबंधित यानों और उन्हें चलाने वाली टीमों की तैयारी पर निर्भर करेगी।
योजना के अनुसार, सबसे पहले न्यू ग्लेन ब्लू मून चाँद पर उतरने वाले यान को लेकर धरती की निचली कक्षा में जाएगा। इसके बाद स्पेस लॉन्च सिस्टम यानी एसएलएस की बारी होगी। यह ओरायन और आर्टेमिस 3 के अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर उड़ेगा। चालक दल में नासा के रैंडी ब्रेस्निक, आंद्रे डगलस और फ्रैंक रुबियो तथा यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के लुका पार्मितानो शामिल हैं। कक्षा में कुछ परीक्षण और दूसरी प्रक्रियाएँ पूरी होने के बाद, अगले चरण में स्टारशिप छोड़ा जाएगा, ताकि वह ओरायन से जुड़ सके। उड़ानों का यह क्रम दिखाता है कि मिशन को किसी एक यान की परीक्षा मानना ठीक नहीं होगा। इसमें अलग-अलग यानों के बीच तालमेल भी परखा जाएगा।
शुरुआती दिनों में ओरायन का रास्ता
ओरायन सीधे अपनी अंतिम कामकाजी कक्षा में नहीं पहुँचेगा। एसएलएस पहले उसे ऐसी कक्षा में छोड़ेगा जिसका आकार बहुत लंबा होगा। इस कक्षा में धरती से सबसे कम दूरी 18 मील, यानी 29 किलोमीटर होगी, जबकि सबसे दूर का बिंदु 1122 मील, यानी 1806 किलोमीटर की ऊँचाई पर होगा। इसके बाद ओरायन अपनी दिशा और गति में कुछ बदलाव करेगा और करीब 345 मील, यानी 555 किलोमीटर की ऊँचाई पर स्थिर कक्षा में पहुँच जाएगा। पार्सन्स के मुताबिक, इस रास्ते का चुनाव उस तापमान की स्थिति से निपटने की ज़रूरत के कारण किया गया है, जहाँ यान को काम करना होगा। ओरायन को मूल रूप से गहरे अंतरिक्ष के अभियानों के लिए तैयार किया गया है।
पहली अहम मुलाकात से पहले चालक दल दो दिन ओरायन और उसके तंत्रों की जाँच में लगाएगा। इस दौरान काम केवल यह देखने तक सीमित नहीं होगा कि यान चल रहा है या नहीं। टीम को उसकी स्थिति की साफ़ जानकारी जुटानी होगी और यात्रियों को यानों को आपस में जोड़ने की प्रक्रिया के लिए तैयार करना होगा। जब किसी अभियान में इंसानों को ले जाने वाले या उन्हें ले जाने के लिए बनाए गए एक से अधिक यान शामिल हों, तो हर यान का काम और बाकी यानों के साथ उसकी प्रतिक्रिया जानना भी परीक्षा का हिस्सा बन जाता है।
जाँच के लिए सबसे पहले ब्लू मून
उड़ान के तीसरे दिन ओरायन की ब्लू मून से करीब 273 मील, यानी 439 किलोमीटर की ऊँचाई पर मुलाकात होनी है। दोनों यान जुड़ने के बाद चालक दल के सदस्य रास्ता खोलकर चाँद पर उतरने वाले यान के भीतर जाएँगे। वहाँ वे हवा और जीवन-रक्षा से जुड़े इंतज़ामों की जाँच करेंगे। वे यह भी देखेंगे कि यान के भीतर हवा का दबाव सही रखा जा सकता है या नहीं। इसके अलावा, योजना में आपात स्थितियों से निपटने के अभ्यास, दोनों यानों को साथ चलाने की जाँच और इन प्रक्रियाओं को संभालने के लिए धरती पर मौजूद नियंत्रण टीमों की तैयारी परखना शामिल है।
ये काम इसलिए अहम हैं क्योंकि इनके ज़रिए किसी यान को सिर्फ़ उसकी बनावट या कागज़ पर नहीं, बल्कि अंतरिक्ष यात्रियों के असली इस्तेमाल में परखा जाएगा। मिसाल के लिए, साँस लेने और सुरक्षित रहने के इंतज़ाम का आकलन सिर्फ़ इस बात से नहीं हो सकता कि उन्हें योजना में शामिल किया गया है। यह देखना भी ज़रूरी है कि यात्रा और काम के दौरान वे चालक दल के लिए सही परिस्थितियाँ बनाए रखते हैं या नहीं। इसी तरह, आपात स्थिति के अभ्यास से टीमों को पूरे मिशन के दौरान प्रतिक्रिया देने का मौका मिलेगा। इससे चाँद पर उतरने की कोशिश के दौरान यानों और नियंत्रण केंद्र के बीच तालमेल की सीमाएँ पहली बार सामने आने का खतरा घटेगा।
ब्लू मून से जुड़ी चालक दल की गतिविधियाँ यान से जुड़ने के बाद करीब दो दिन तक चलने की उम्मीद है। अगर यह चरण योजना के मुताबिक पूरा हुआ, तो स्टारशिप की उड़ान मिशन के लगभग छठे दिन होगी। इसलिए ब्लू मून की जाँच केवल पास आने और थोड़ी देर के लिए जुड़ने तक सीमित नहीं है। इसमें चालक दल का यान के अंदर जाना, उसके भीतरी माहौल को परखना और उसके तंत्रों की जाँच करना भी शामिल है।
स्टारशिप के साथ जुड़ने की अलग परीक्षा
अगले चरण में चाँद पर उतरने की योजना के दूसरे साझेदार की जाँच होगी। इस अभियान में हिस्सा लेने वाला स्टारशिप, दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले रॉकेट का ऊपरी हिस्सा है। इसकी लंबाई 171 फीट, यानी करीब 52 मीटर है। इसके अगले हिस्से पर जुड़ने के लिए एक खास यंत्र लगाया जाएगा। योजना है कि मिशन के आठवें दिन यह करीब 237 मील, यानी 381 किलोमीटर की ऊँचाई पर ओरायन से मिले।
इस मुलाकात के दौरान अंतरिक्ष यात्री स्टारशिप के भीतर नहीं जाएँगे, जबकि ब्लू मून के साथ वे ऐसा करेंगे। स्टारशिप के साथ जुड़ने की तय प्रक्रिया करीब दो घंटे चलेगी। इसमें यह देखा जाएगा कि पास आते और संपर्क में आते समय दोनों यान किस तरह एक-दूसरे को छूते हैं और एक-दूसरे पर कितना दबाव डालते हैं। साथ ही, यह समझने की कोशिश होगी कि दोनों यान मिलकर किस तरह काम करते हैं। आगे के अभियानों के लिए ये बारीकियाँ निर्णायक हो सकती हैं। अंतरिक्ष में दो यानों का जुड़ना केवल एक ही जगह पहुँच जाने का मामला नहीं है; इसके लिए नियंत्रित गति और यान, चालक दल तथा नियंत्रण केंद्रों के बीच तालमेल चाहिए।
एक ही मिशन में दोनों मुलाकातें करने से नासा की टीमों को ओरायन के साथ काम करने के दो अलग तरीकों के बारे में जानकारी मिलेगी। ब्लू मून के साथ लंबी जाँच होगी, जिसमें चालक दल उसके भीतर जाएगा। दूसरी ओर, स्टारशिप के साथ छोटी जाँच होगी और अंतरिक्ष यात्री उसमें प्रवेश नहीं करेंगे। इससे यह पहले से तय नहीं हो जाएगा कि अगली बार चाँद पर उतरने के लिए कौन-सा यान चुना जाएगा। लेकिन एजेंसी को दोनों की तुलना करने और उनकी तैयारी की समीक्षा करने का काम का अनुभव ज़रूर मिलेगा।
परीक्षणों के बाद चालक दल क्या करेगा
ओरायन के स्टारशिप से अलग होते ही मिशन खत्म नहीं होगा। योजना के मुताबिक, धरती लौटने से पहले चालक दल छह से नौ दिन और अंतरिक्ष में बिता सकता है। वापसी के अंत में यान समुद्र में उतरेगा और पैराशूट उसकी गति कम करने में मदद करेंगे। मिशन की मूल अवधि 14 दिन रखी गई है, हालाँकि यह बढ़कर 17 दिन तक हो सकती है। इस अतिरिक्त समय का इस्तेमाल दूसरे काम पूरे करने में भी किया जा सकेगा; चालक दल को बस वापसी की तारीख आने तक इंतज़ार नहीं करना होगा।
अंतरिक्ष यात्री अपने सुरक्षा सूटों का भी आकलन करेंगे। यह जाँच अप्रैल 2026 में चाँद के चारों ओर हुई आर्टेमिस 2 की 10 दिन लंबी उड़ान के दौरान नहीं की गई थी। योजना में स्वास्थ्य की बारीक जाँच, वैज्ञानिक प्रयोग और नई तकनीक के प्रदर्शन भी शामिल हैं। इन कामों से नासा इस यात्रा से मिलने वाली सीख का दायरा बढ़ा सकेगा। इससे यानों के जुड़ने के समय उनके व्यवहार के साथ-साथ चालक दल और उसके उपकरणों के प्रदर्शन की जानकारी भी मिलेगी।
इस योजना के पीछे व्यापक सोच यह है कि ओरायन के धरती के पास होने का लाभ उठाकर टीमों को साथ काम करने और इंसानों की मौजूदगी वाले अभियान में उसी समय फैसले लेने का अभ्यास कराया जाए। कोई गड़बड़ी होने पर चाँद के दूर के अभियान की तुलना में धरती लौटना अपेक्षाकृत जल्दी संभव होगा। इसका यह मतलब नहीं कि परीक्षणों में कोई जोखिम नहीं है। फिर भी, धरती के नज़दीक का माहौल अनुभव हासिल करने का मौका देता है, ताकि चाँद पर उतरने की ऐसी कोशिश से पहले सीख ली जा सके जिसमें ज़्यादा तालमेल की ज़रूरत होगी और अचानक सामने आई समस्या से निपटने की गुंजाइश कम होगी।
आर्टेमिस 4 में चाँद पर कौन उतरेगा
नासा ने अभी यह तय नहीं किया है कि आर्टेमिस 4 में ब्लू मून चाँद पर अंतरिक्ष यात्रियों को उतारेगा या स्टारशिप। एजेंसी दोनों विकल्प खुले रखना चाहती है, ताकि प्रदर्शन, तैयारी और काम पूरा करने की तारीखों से जुड़ी जानकारी सामने आने से पहले किसी एक रास्ते को खारिज न करना पड़े। नासा के प्रशासक जेरेड आइज़ैकमैन ने कहा कि एजेंसी चाहती है कि चाँद पर उतरने के दोनों साझेदार 2028 में चाँद के दक्षिणी ध्रुव के पास अंतरिक्ष यात्रियों को उतारने से पहले तैयार होने का मौका पाएँ। उनके मुताबिक, फैसला आँकड़ों और समय-सारिणी से मिलने वाली जानकारी के आधार पर होना चाहिए।
दोनों यानों की काम करने की योजना एक जैसी होना ज़रूरी नहीं है। ब्लू ओरिजिन की योजना में ओरायन चाँद की कक्षा में ब्लू मून से मिलेगा। स्पेसएक्स की योजना में स्टारशिप के धरती की कक्षा में नासा के कैप्सूल से जुड़ने की संभावना है और फिर स्टारशिप उसे चाँद की दिशा में ले जाएगा। इसलिए दोनों में से किसी एक को चुनने का सवाल केवल चाँद पर उतरने वाले यान का नाम चुनने का नहीं है। इससे यह भी तय होगा कि यात्रा के अलग-अलग चरण कैसे बाँटे जाएँगे और यानों की मुलाकातें कहाँ होंगी।
फिर भी, पार्सन्स ने बताया कि दोनों कंपनियाँ 2028 में चाँद पर उतरने वाले मिशनों की योजना बना रही हैं, चाहे उनमें से कोई भी पहले पहुँचे। ये योजनाएँ सफल हुईं, तो इंसानों की चाँद की सतह पर वापसी 1972 में अपोलो 17 के बाद एक बड़ा कदम होगी। लेकिन योजना का ज़िक्र होना इस बात की गारंटी नहीं है कि मिशन निश्चित रूप से सफल होगा। असली तैयारी का पता परीक्षणों के नतीजों और यानों को बनाने में हुई प्रगति से चलेगा।
लक्ष्य की तारीख और देरी की आशंका
नासा आर्टेमिस 3 को 2027 की गर्मियों में उड़ाने का लक्ष्य रख रहा है। यह अक्टूबर 2026 में हुई घोषणा के अगले साल की गर्मियाँ होंगी, लेकिन इस तारीख तक पहुँचना मुश्किल हो सकता है। इससे पिछले महीने सामने आए एक अंदरूनी ज्ञापन में बताया गया था कि मिशन तय समय-सारिणी से करीब 90 दिन पीछे चल रहा है। इसका मतलब है कि तय लक्ष्य पर लगातार नज़र रखनी होगी। इससे यह नहीं मानना चाहिए कि उड़ान की तारीख अंतिम हो चुकी है या देरी आगे नहीं बढ़ेगी।
पार्सन्स ने चाँद पर उतरने वाले यानों के लिए सामान पहुँचाने की व्यवस्था में दिक्कतों को भी चुनौती बताया। मिशन की सफलता दोनों कंपनियों द्वारा बनाए जा रहे यानों की तैयारी के साथ-साथ एसएलएस और ओरायन की तैयारी पर निर्भर करती है। इन सबकी उड़ानों और उनके बीच जुड़ने की प्रक्रियाओं का क्रम भी सही बैठना चाहिए। नासा के अधिकारियों ने भरोसा जताया है कि इन अड़चनों को दूर किया जा सकेगा। लेकिन उम्मीद जताने वाले बयान इस ज़रूरत को खत्म नहीं करते कि उड़ान की तारीख पक्की करने से पहले तकनीकी काम और सामान की व्यवस्था पूरी की जाए।
सामने आई योजना इसलिए अहम है क्योंकि इससे साफ़ होता है कि नासा अलग-अलग यानों के बीच सहयोग से आगे की चंद्र-यात्रा में काम आने वाला अनुभव कैसे हासिल करना चाहता है। आर्टेमिस 3 की सफलता केवल इस बात से नहीं आँकी जाएगी कि यान कक्षा में पहुँच गए या एक-दूसरे से जुड़ गए। यह भी देखना होगा कि परीक्षण साँस लेने और सुरक्षित रहने के इंतज़ाम, तापमान को संभालने और यानों को चलाने के बारे में क्या बताते हैं, और अलग-अलग हालात में टीमें कितनी अच्छी प्रतिक्रिया दे पाती हैं। इन्हीं नतीजों से 2028 में चाँद पर उतरने की राह की तस्वीर और साफ़ होगी।
निष्कर्ष
आर्टेमिस 3 में नासा चाँद पर इंसानों को वापस भेजने की कोशिश से पहले धरती की कक्षा में मानव-सहित परीक्षण करना चाहता है। योजना में न्यू ग्लेन ब्लू मून को कक्षा में पहुँचाएगा, एसएलएस ओरायन के चालक दल को ले जाएगा और फिर ओरायन पहले ब्लू मून तथा उसके बाद स्टारशिप से जुड़ेगा। दोनों के साथ होने वाली जाँच अलग-अलग तरह की होगी। मिशन 14 दिन का रखा गया है और 17 दिन तक चल सकता है। इसका लक्ष्य 2028 के आर्टेमिस 4 अभियान का जोखिम घटाना है। हालाँकि, चाँद पर उतरने वाले यान का चुनाव और 2027 की गर्मियों में उड़ान का लक्ष्य—जो एक अंदरूनी ज्ञापन के अनुसार करीब 90 दिन पीछे है—परीक्षणों के नतीजों और सामान की आपूर्ति तथा समय-सारिणी की चुनौतियों पर निर्भर करेंगे।