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नोलू तूफान का सफर: एक अनोखी कहानी

सरल शब्दों में

नोलू तूफान मध्य प्रशांत महासागर से पश्चिम की ओर बढ़ रहा है। यह एक शक्तिशाली तूफान बन गया है, लेकिन फिलहाल कोई तटीय चेतावनी नहीं है। हालांकि, आने वाले दिनों में कुछ द्वीपों पर बड़ी लहरों का असर हो सकता है।

नोलू का मार्ग और वर्तमान प्रभाव

3 अक्टूबर को, नोलू तूफान का केंद्र लिसियान्स्की द्वीप से 390 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में था। इसकी हवा की गति 175 किलोमीटर प्रति घंटा थी और यह 30 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से पश्चिम की ओर बढ़ रहा था।

हालांकि कोई तटीय चेतावनी नहीं है, लेकिन इस तूफान से उत्पन्न बड़ी लहरें कुछ निचले द्वीपों जैसे मारो रीफ और लिसियान्स्की द्वीप को प्रभावित कर सकती हैं।

तूफान से टाइफून में परिवर्तन

मौसम विज्ञान के अनुसार, 119 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक गति वाले तूफान को मध्य प्रशांत में ‘हेरिकेन’ कहा जाता है, जबकि पश्चिमी प्रशांत में इसे ‘टाइफून’ कहा जाता है। नोलू के 180 डिग्री देशांतर पार करने के बाद, इसे टाइफून के रूप में पुनः वर्गीकृत किया जाएगा।

इस परिवर्तन के साथ, मौसम की निगरानी की जिम्मेदारी जापान की मौसम एजेंसी को सौंप दी जाएगी।

नोलू का भविष्य

नोलू तूफान के और अधिक शक्तिशाली होने की संभावना है, जिसमें इसकी गति 215 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। हालांकि, 6 और 7 अक्टूबर के बीच इसके कमजोर होने की संभावना है, जिसका कारण उत्तर-पूर्व से आने वाली शुष्क हवाएं होंगी।

यह कमजोरी एक अन्य तूफान ‘चोई वान’ के कारण हो सकती है, जो क्षेत्र में मौसम की परिस्थितियों को बदल रहा है।

इतिहास में 180 डिग्री देशांतर पार करने वाले तूफान

तूफानों का 180 डिग्री देशांतर पार करना असामान्य है, जो कुछ वर्षों में एक बार होता है। 1949 से 2025 तक, 27 बार ऐसा हुआ है, जिनमें से 12 बार यह तूफान की शक्ति के साथ हुआ।

यदि नोलू अपनी वर्तमान शक्ति के साथ इस देशांतर को पार करता है, तो यह उन दुर्लभ शक्तिशाली तूफानों की सूची में शामिल हो जाएगा।

निष्कर्ष

नोलू तूफान एक अद्वितीय अध्ययन का विषय है, जो दो भौगोलिक क्षेत्रों के बीच शक्ति और परिवर्तन को दर्शाता है। इसके कमजोर होने की संभावना के बावजूद, इसके वर्तमान और भविष्य के प्रभाव मौसम विज्ञानियों के लिए अत्यधिक रुचिकर हैं।