आसान शब्दों में
हबल अंतरिक्ष दूरबीन अब भी अच्छी तरह काम कर रही है, लेकिन पृथ्वी के आसपास की बहुत हल्की हवा धीरे-धीरे इसकी कक्षा को नीचे ला रही है। नासा यह पता लगा रही है कि अंतरिक्ष में ही इसकी सेवा करके इसे और लंबे समय तक काम करने दिया जा सकता है या नहीं। अगर ऐसा करना ठीक न हो, तो दूरबीन का मिशन सुरक्षित तरीके से खत्म करने की योजना भी बनाई जा सकती है।
दूरबीन ठीक है, लेकिन कक्षा बदल रही है
हबल को लेकर मौजूदा चिंता यह नहीं है कि उसने देखना बंद कर दिया है या उसके किसी उपकरण में खराबी आ गई है। नासा की सार्वजनिक जानकारी के मुताबिक, दूरबीन अब भी ठीक तरह से काम कर रही है। असली परेशानी उसकी कक्षा से जुड़ी है: पृथ्वी के आसपास मौजूद वायुमंडल का हल्का-सा खिंचाव उसे धीरे-धीरे नीचे की कक्षा में धकेल रहा है। वहां हवा बेहद विरल है, फिर भी लंबे समय में उसका असर जमा होता जाता है और दूरबीन की ऊंचाई घटती रहती है। अगर कुछ नहीं बदला, तो आखिरकार उसका वायुमंडल में लौटना तय माना जा रहा है।
नासा के अनुमान के अनुसार, हबल 2033 या 2034 में पृथ्वी के वायुमंडल में फिर प्रवेश कर सकता है। इसी समय-सीमा को देखते हुए, दूरबीन की सेवा करके उसकी उम्र बढ़ाने की कोई भी कोशिश 2032 में की जानी चाहिए, ऐसा नासा ने बताया है। योजना बनाने और उसे पूरा करने के लिए यह बहुत लंबा समय नहीं है। तय समय से पहले मिशन पर विचार करना होगा और ऐसा यान उपलब्ध होना चाहिए जो हबल तक पहुंचकर कक्षा में उसके साथ काम कर सके।
29 अक्टूबर को नासा ने जो जानकारी मांगी, वह किसी तैयार मिशन को प्रक्षेपित करने की घोषणा नहीं थी। इससे यह भी साबित नहीं होता कि दूरबीन को बचाने का फैसला हो चुका है। यह कदम अंतरिक्ष में यानों की सेवा करने वाली संस्थाओं से यह जानने के लिए उठाया गया है कि वे क्या-क्या कर सकती हैं और कौन-से उपाय व्यवहार में अपनाए जा सकते हैं। विचारों में हबल की कक्षा को ऊंचा करना भी शामिल है। नासा ने यह भी कहा है कि ऐसे काम सुझाए जा सकते हैं जिनसे दूरबीन की क्षमता किसी तरह बढ़े। उपलब्ध जानकारी में किसी खास यान की बनावट या काम करने के तरीके का खुलासा नहीं किया गया है।
ऐसी वैज्ञानिक विरासत, जिसका विकल्प तुरंत नहीं
हबल की यात्रा अप्रैल 1990 में शुरू हुई थी। यह नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का साझा मिशन है। तब से यह ब्रह्मांड के अध्ययन में एक अहम दूरबीन बनी हुई है। इसके आंकड़ों ने ग्रहों, तारों, आकाशगंगाओं और दूसरी खगोलीय वस्तुओं तथा घटनाओं पर हुए शोध में योगदान दिया है। इसकी बड़ी उपलब्धियों में यह दिखाने में मदद करना शामिल है कि ब्रह्मांड का फैलाव तेज हो रहा है। इस नतीजे से जुड़ी खोज को नोबेल पुरस्कार मिला था।
हबल का महत्व किसी एक खोज या मशहूर तस्वीर तक सीमित नहीं है। नासा का अनुमान है कि इसके अवलोकनों से कम-से-कम 23,000 वैज्ञानिक शोध-पत्र प्रकाशित हुए हैं। हबल के समय की मांग भी उपलब्ध समय से कहीं अधिक है। नासा के मुताबिक, खगोलविद हर साल जितने घंटे दूरबीन से अवलोकन करना चाहते हैं, वह उपलब्ध समय से करीब 7 गुना है। यह अंतर बताता है कि हबल को जारी रखने की बात केवल उसकी लंबी उम्र से जुड़ी भावुकता नहीं है। शोधकर्ता आज भी इसका इस्तेमाल करना चाहते हैं, और उनकी मांग दूरबीन के उपलब्ध समय से बहुत ज्यादा है।
कभी-कभी हबल दूसरी वेधशालाओं के साथ मिलकर काम करता है और साझा अवलोकन कार्यक्रमों में योगदान देता है। इसलिए अगर इसे और समय तक कक्षा में रखा जा सके, तो वैज्ञानिक इसके आंकड़ों का इस्तेमाल जारी रख सकते हैं और इसके अवलोकनों की तुलना दूसरे उपकरणों से कर सकते हैं। फिर भी, वैज्ञानिक महत्व अकेले यह तय नहीं करता कि मिशन आगे बढ़ना चाहिए या नहीं। किसी भी प्रस्तावित काम का सुरक्षित और व्यावहारिक होना जरूरी है, और उससे मिलने वाला लाभ उसकी लागत तथा जोखिमों के मुकाबले उचित होना चाहिए।
आम लोगों के बीच भी हबल की पहचान बहुत व्यापक है। इसकी तस्वीरों में ईगल नेबुला के भीतर सृजन के स्तंभों के बार-बार दिखाए गए दृश्य खास तौर पर मशहूर हैं। ऐसी तस्वीरों ने ब्रह्मांड के बहुत दूर के इलाकों को लाखों लोगों के लिए जाना-पहचाना बना दिया है। यह लोकप्रियता भी हबल के भविष्य पर ध्यान देने की एक वजह है, लेकिन इससे इंजीनियरिंग की चुनौतियां खत्म नहीं होतीं। दूरबीन दशकों से कक्षा में है, इसलिए उसके पास जाना या उसकी दिशा और कक्षा बदलना बहुत सावधानी से योजना बनाने के बाद ही संभव है।
पुराने प्रस्ताव से फिर खुली चर्चा
हबल की मरम्मत या सेवा का विचार नया नहीं है। 2022 में तकनीकी उद्यमी जारेड आइज़ैकमैन ने हबल की सेवा के लिए स्पेसएक्स के उपकरणों का इस्तेमाल करने का प्रस्ताव दिया था। उस समय नासा ने इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी। एजेंसी को चिंता थी कि दूरबीन के साथ यान को जोड़ने या उस पर कोई काम करने से, जबकि वह ठीक तरह से चल रही थी, उसे बेवजह खतरा हो सकता है।
इसके बाद आइज़ैकमैन की भूमिका बदल गई है। दिसंबर 2025 में वह नासा के प्रमुख बन गए। 30 अक्टूबर को जारी एजेंसी के बयान में उन्होंने कहा कि हर उस उचित मौके की जांच होनी चाहिए जिससे हबल को ज्यादा से ज्यादा समय तक उपयोगी बनाए रखा जा सके। साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि उसकी सेवा की लागत किसी नए मिशन को भेजने की लागत से कम है या नहीं। उसी दिन अपनी एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि विकल्पों की पड़ताल करना अब भी मेहनत के लायक है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि नासा पहले कक्षा में दूरबीन को बनाए रखने के कम खर्च वाले उपाय पर विचार कर चुकी है।
आइज़ैकमैन को स्पेसएक्स के यानों से की गई मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ानों का अनुभव भी है। उन्होंने पृथ्वी की कक्षा तक की दो उड़ानों के लिए भुगतान किया और उनका नेतृत्व किया: पहली सितंबर 2021 में और दूसरी सितंबर 2024 में। लेकिन इन उड़ानों का मतलब यह नहीं है कि हबल की सेवा की योजना तैयार हो गई है या पुराना प्रस्ताव ज्यों का त्यों फिर से लागू किया जा रहा है। फिलहाल नासा पूरे मामले का दोबारा आकलन कर रही है और सेवा की संभावनाओं के बारे में जानकारी मांग रही है। अभी किसी यान, चालक दल या बजट को मंजूरी मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।
दूरबीन को बचाना ही अकेला रास्ता नहीं
हबल की मरम्मत या उसकी कक्षा ऊंची करने के साथ-साथ नासा के अनुरोध में एक अलग विकल्प भी शामिल है: वायुमंडल में उसकी वापसी को सुरक्षित और नियंत्रित ढंग से अंजाम देने की योजना बनाना, या मिशन खत्म होने पर उसे ऐसी कक्षा में पहुंचाना जो इसके लिए उपयुक्त हो। इस विकल्प का शामिल होना अहम है, क्योंकि इससे स्पष्ट होता है कि चर्चा किसी भी कीमत पर दूरबीन को बचाने की नहीं है। अगर सेवा करना व्यावहारिक या किफायती न हो, तो नासा मिशन को आगे बढ़ाने और उसे जिम्मेदारी से समाप्त करने के तरीकों की तुलना करना चाहती है।
कक्षा के धीरे-धीरे नीचे आने के कारण होने वाली वापसी और पहले से बनाई गई वापसी-योजना में फर्क यह है कि दूसरे मामले में मिशन के अंत को संभालने की कोशिश की जा सकती है, न कि सब कुछ सिर्फ कक्षा में होने वाले बदलावों पर छोड़ दिया जाए। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में किसी भी विकल्प को पूरा करने का तरीका नहीं बताया गया है। यह भी साफ नहीं है कि हबल के रास्ते को किस हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा। इसलिए ये फिलहाल उन विषयों के नाम हैं जिनका नासा अध्ययन करना चाहती है, न कि ऐसी अंतिम योजनाएं जिनके नतीजों का दावा किया जा सके।
दूरबीन की सेवा के बारे में विचार से अमल तक पहुंचने से पहले कई बुनियादी सवालों के जवाब चाहिए। कौन-सा यान हबल तक पहुंच सकता है? उस पर किस तरह का काम किया जा सकेगा? अभी भी काम कर रही दूरबीन के लिए जोखिम कैसे घटाए जाएंगे? और दूसरे विकल्पों की तुलना में इसकी लागत कितनी होगी? नासा की अब तक जारी जानकारी इन सवालों के विस्तृत जवाब नहीं देती। लेकिन जानकारी मांगने से एजेंसी यह जान सकती है कि इस क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाएं क्या उपाय पेश कर सकती हैं।
इस मामले में समय का हिसाब खास तौर पर अहम है। अगर हबल के 2033 या 2034 में वायुमंडल में प्रवेश करने का अनुमान है, तो नासा ने सेवा की किसी भी कोशिश के लिए 2032 को समय तय किया है। इसका अर्थ है कि विकल्पों पर उस साल से पहले पर्याप्त समय देना होगा, ताकि मिशन को मंजूरी दी जा सके, उसका डिजाइन बनाया जा सके और जरूरी तैयारी पूरी हो सके। फैसला करने में देरी होने से उपलब्ध समय और सीमित हो सकता है, भले ही कागज पर कोई अच्छा विचार सामने आ जाए।
हबल का भविष्य किन बातों से तय होगा?
नासा के सामने लाभ, जोखिम और लागत—तीनों को साथ रखकर फैसला करने की चुनौती है। हबल को जारी रखने से लंबे वैज्ञानिक इतिहास वाली एक वेधशाला बची रह सकती है, जिसकी सेवाओं की मांग अब भी बहुत अधिक है। लेकिन कक्षा में मौजूद पुराने अंतरिक्ष यान की सेवा करना आसान काम नहीं है। नासा पहले भी इसी दिशा के एक प्रस्ताव को दूरबीन की सुरक्षा को लेकर चिंता के कारण ठुकरा चुकी है। इसलिए केवल यह चाहना काफी नहीं कि हबल बचा रहे। उपाय ऐसा होना चाहिए जिसे सचमुच पूरा किया जा सके और जिससे दूरबीन के बचे हुए कामकाजी जीवन पर उससे भी बड़ा खतरा न आए।
लागत की तुलना का यह मतलब भी नहीं कि नया मिशन भेजना ही अगला सीधा कदम होगा, या हबल की उम्र बढ़ाने का काम निश्चित तौर पर सस्ता पड़ेगा। आइज़ैकमैन के बयान में लागत को उन सवालों में रखा गया है जिनकी जांच होनी चाहिए। उसमें किसी वित्तीय अध्ययन का नतीजा घोषित नहीं किया गया और न ही संसाधन देने का फैसला बताया गया है। इसी तरह, जानकारी मांगने वाले अनुरोध में यह तय नहीं किया गया कि मिशन कौन करेगा। इससे यह भी साबित नहीं होता कि नासा को मिलने वाले प्रस्तावों में से किसी एक को चुन ही लिया जाएगा।
अभी तक पक्की बात सिर्फ इतनी है कि नासा ने हबल के भविष्य पर चर्चा फिर शुरू की है और अंतरिक्ष में उससे निपटने के तरीकों के बारे में जानकारी मांगी है। वायुमंडल में उसके संभावित प्रवेश से पहले कुछ ही साल बचे हैं, लेकिन एजेंसी ने अब तक यह घोषणा नहीं की है कि उसकी कक्षा ऊंची की जाएगी या उसकी सेवा के लिए नया मिशन भेजा जाएगा। 1990 से चली आ रही वैज्ञानिक विरासत, दूरबीन के इस्तेमाल की लगातार मांग और उसमें दखल देने के जोखिम—इन सबके बीच फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि विकल्पों की पड़ताल से क्या सामने आता है।
निष्कर्ष
जारी जानकारी के अनुसार, हबल में ऐसी खराबी नहीं है जिसने उसका काम रोक दिया हो। उसकी चुनौती यह है कि वायुमंडल के हल्के खिंचाव से उसकी कक्षा धीरे-धीरे नीचे आ रही है और वह अपने कक्षीय जीवन के अंत के करीब पहुंच रही है। नासा यह जानना चाहती है कि अंतरिक्ष में उसकी सेवा करके मिशन को बढ़ाया जा सकता है या सुरक्षित तरीके से उसे समाप्त करने की तैयारी करना बेहतर होगा। 23,000 से अधिक शोध-पत्रों में योगदान और उपलब्ध समय से करीब 7 गुना अधिक अवलोकन-मांग के कारण उसकी उम्र बढ़ाने के विकल्प पर विचार करना मायने रखता है, लेकिन इससे यह तय नहीं हो जाता कि ऐसा होगा ही। 2033 या 2034 में वायुमंडल में वापसी की आशंका और 2032 में सेवा की संभावित कोशिश की समय-सीमा को देखते हुए, अंतिम फैसला केवल इच्छा से नहीं, बल्कि सुरक्षा, व्यावहारिकता और लागत से तय होगा।